प्रधानमंत्री ने कोपेनहेगन की सीमित उपलब्धियों पर निराशा जताई
यहां 10वें दिल्ली सतत विकास सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत कोपेनहेगन समझौते का पूरी तरह समर्थन करता है और वह इसे आगे ले जाएगा। उन्होंने कहा कि यह करार विचार विमर्श के बाद निर्धारित विधिसम्मत दायित्व नहीं बल्कि स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं की सूची है।
उन्होंने कहा कि केवल विश्वास के बल पर किया गया महत्वाकांक्षी समझौता इस पूरी प्रक्रिया की साख को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि इसमें देशों नेअपनी ओर से प्रतिबद्धताएं यह अनुमान लगाते हुए व्यक्त की हैं कि वे उन्हें पूरा कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि पूरी तरह लागू होने वाला साधारण करार ऐसे महत्वाकांक्षी करार से बेहतर है, जिसमें निर्धारित लक्ष्यों को हासिल ही न किया जा सके। उन्होंने कहा कि क्योटो संधि से यही सबक हमें सीखना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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