जलवायु परिवर्तन पर भारत का अपना पैनल होगा : जयराम रमेश

रमेश ने एक समाचार चैनल से कहा, "जलवायु विज्ञान और जलवायु के बारे में भ्रांति के बीच मामूली अंतर है। मैं जलवायु विज्ञान के लिए हूं न कि जलवायु के बारे में भ्रांति के लिए। मुझे लगता है कि लोगों ने आईपीसीसी की रिपोर्ट का इस्तेमाल किया।"

जलवायु परिवर्तन पर भारत के अपने पैनल की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि आईपीसीसी की कमजोरी यह थी कि वह मौलिक शोध नहीं करवाता और वह प्रकाशित सामग्रियों के आधार पर निष्कर्ष निकालता है।

उन्होंने हालांकि कहा कि करीब 200 वैज्ञानिकों वाला आईपीसीसी एक जिम्मेदार संस्था हैं।

रमेश ने कहा, "मैं आईपीसीसी का सम्मान करता हूं लेकिन भारत एक बड़ा देश है और हम केवल आईपीसीसी पर निर्भर नहीं रह सकते। इसीलिए हमने व्यापक जलवायु परिवर्तन मूल्यांकन का भारतीय नेटवर्क शुरू किया है। पूरे देश में इसके 125 शोध संस्थान होंगे। यह एक तरह का भारतीय आईपीसीसी है न कि आईपीसीसी का प्रतिद्वंद्वी। हम अपना मूल्यांकन खुद करेंगे।"

उन्होंने कहा कि यह संस्था नवंबर में अपना पहला मूल्यांकन पेश करेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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