पश्चिम बंगाल में थमने का नाम नहीं ले रही हैं राजनीतिक हत्याएं

कोलकाता, 31 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में जारी राजनीतिक हत्याओं की घटनाओं ने लोगों के मन में 60 और 70 के दशकों की उन यादों को ताजा कर दिया है जब यह राज्य राजनीतिक हिंसा की आग में जल उठा था।

मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य द्वारा गत वर्ष विधानसभा में प्रस्तुत किए गए एक आंकड़े के मुताबिक एक जनवरी से 13 नवम्बर, 2009 के बीच राजनीतिक हिंसाओं में 69 लोगों की मौत हुई। इन हिंसाओं में सत्ताधारी मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के 47, विपक्षी तृणमूल कांग्रेस के 15, कांग्रेस के चार, झारखण्ड डेमोक्रेटिक पार्टी (जेडीपी) के दो और झारखण्ड पार्टी (नरेन) के एक कार्यकर्ता की हत्या हुई।

मारे गए इन लोगों में 28 की मौत तो सिर्फ नक्सल प्रभावित मिदनापुर, बांकुड़ा और पुरूलिया जिले में हुई। इसके अलावा इस दौरान 12 पुलिसकर्मियों की भी मौत हुई।

इन सरकारी आंकड़ों के इतर माकपा का दावा है कि लोकसभा चुनावों के परिणाम आने के दिन से अब तक कम से कम उसके 163 कार्यकर्ताओं की मौत मिदनापुर, बांकुड़ा, पुरूलिया और दक्षिणी 24 परगना और मुर्शिदाबाद जिले में हुई है।

उधर, तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि पिछले आठ महीनों में उसके 166 कार्यकर्ताओं की हत्याएं हुई हैं। बहरहाल, माकपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच इन राजनीतिक हत्याओं को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है।

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पार्थ चट्टोपाध्याय ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "प्रदेश में होने वाली इन राजनीतिक हत्याओं के बारे में हमने समय-समय पर केंद्र सरकार को जानकारी दी है लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।"

उन्होंने कहा, "राज्य में जारी राजनीतिक हिंसा के लिए वाम मोर्चे की सरकार को हटा दिया जाना चाहिए। हम मांग करते है कि पश्चिम बंगाल में शांति स्थापित करने के लिए जल्द चुनाव करवाया जाए।"

उधर, माकपा का आरोप है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने के मद्देनजर माहौल बनाने के लिए तृणमूल कांग्रेस कानून-व्यवस्था का मखौल उड़ा रही है।

माकपा नेता मोहम्मद सलीम ने कहा, "तृणमूल कांग्रेस की राजनीति का आधार ही हिंसा है। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वह हत्याएं करवा रही है ताकि लोग भय के माहौल में रहे। यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में माकपा कमजोर हुई है और तृणमूल कांग्रेस आगे बढ़ी है।"

उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर राजनीतिक हिंसा भड़काने का आरोप लगाया और कहा कि राष्ट्रपति शासन लागू कराने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए वह माकपा कार्यकर्ताओं की हत्याएं करवा रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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