गायत्री देवी के वारिस सोने की वापसी के लिए उच्च न्यायालय पहुंचे
नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। जयपुर राजघराने की महारानी गायत्री देवी के वारिसों ने सरकार द्वारा वर्ष 1975 में जब्त किए गए करीब 800 किलोग्राम सोने की वापसी के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
यह सोना गायत्री देवी के पति दिवंगत महाराजा सवाई मान सिंह की निजी संपत्ति था। स्वर्ण नियंत्रण कानून, 1968 के अनुसार इसकी घोषणा नहीं करने पर आयकर विभाग ने इसे जब्त कर लिया था। यह कानून अब समाप्त कर दिया गया है।
स्वर्ण नियंत्रण प्रशासक (दिल्ली) के वर्ष 1980 के आदेश को चुनौती देते हुए मान सिंह के वारिस और उनके बड़े पुत्र ब्रिगेडियर (अवकाश प्राप्त) सवाई भवानी सिंह ने अपनी याचिका में कहा, "हमारे लिए मानने का कोई कारण नहीं है कि पूरे सोने को स्वर्ण नियंत्रण कानून के तहत घोषित नहीं किया गया था।"
शुक्रवार को एक संक्षिप्त सुनवाई में केंद्र सरकार के वकील एस.के.दुबे ने न्यायाधीश मुरलीधर को बताया कि स्वर्ण नियंत्रण कानून और भारतीय सुरक्षा नियमों 1968 के अनुसार कच्चे सोने का प्रसंस्करण अवैध है और यदि ऐसा पाया गया तो पूरे सोने को अधिकृत डीलर या स्वर्णकार को छह महीने के भीतर बेचे जाने का प्रावधान है।
दुबे ने कहा कि राजपरिवार ने दोनों कानूनों का उल्लंघन किया, इसलिए उसपर सरकार ने 1.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। बाद में इसे घटाकर 80 लाख रुपये कर दिया गया।
दुबे की बहस पूरी नहीं हो पाई और सोमवार को भी जारी रहेगी।
अपनी याचिका में भवानी सिंह ने भारत-पाकिस्तान के बीच वर्ष 1971 के युद्ध में उठाए गए जोखिम और वीरता के लिए महावीर चक्र मिलने का उल्लेख किया।
राजघराने को इस मामले में जयपुर की एक स्थानीय अदालत में वर्ष 2002 में हार का सामना करना पड़ा था। अदालत ने कहा कि शाही किले से जब्त किया गया सोना एक छिपे खजाने का हिस्सा था और भारतीय खजाना निधि कानून, 1878 के अनुसार किसी भी छिपे खजाने पर राज्य सरकार का स्वामित्व है।
राजपरिवार का कहना है कि सोना शाही परिवार की निजी संपत्ति है और उस पर अन्य किसी का अधिकार नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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