बेणेश्वर मेले में पालकी यात्रा एवं शाही स्नान संपन्न
अलौकिक लीलावतार और त्रिकालज्ञ संत मावजी महाराज की तपस्या स्थली के रूप में जगविख्यात बेणेश्वर टापू और इससे जुड़ी सरिताओं के तटों पर कई किलोमीटर तक फैला मेला चरम यौवन पर रहा। माघ पूर्णिमा और शनि पुष्य के योग में हजारों श्रद्घालुओं ने माही, सोम और जाखम नदियों के पवित्र जलसंगम तीर्थ में स्नान किया, दिवंगत परिजनों को याद कर उनकी मुक्ति की कामना से अस्थियों का विसर्जन किया और मुण्डन, तर्पण, सामूहिक भोज तथा पूजा-अर्चना आदि अनुष्ठान किए। बेणेश्वर धाम के बेणेश्वर तथा राधाकृष्ण मन्दिरों सहित विभिन्न मन्दिरों पर श्रद्घालुओं का तांता दिन भर बंधा रहा।
माघ पूर्णिमा पर शनिवार को साबला हरि मन्दिर से हजारों पदयात्रियों के साथ पीठाधीश्वर और निष्कलंक भगवान की पालकियां जैसे ही बेणेश्वर धाम पहुंचीं, मेले का माहौल उत्साह से भर गया और पालकियों की भक्तिभाव से अगवान की गई। इसके बाद पालकियां राधा कृष्ण मन्दिर पहुंचीं जहां कुछ देर विश्राम के बाद महंत की पालकी शाही स्नान के लिए हजारों भक्तों के काफिले के साथ प्रधान जलसंगम तीर्थ आबूदर्रा पहुंची जहां महंतश्री ने माव परम्परा के विधि-विधान से स्नान किया।
इसके बाद हजारों भक्तों ने भी पवित्र जल तीथरें का स्मरण कर संगम में डुबकी लगाई। शाही स्नान के समय मीलों तक का परिक्षेत्र हर हर गंगे, जय बेणेशर, जय माही मां , जै मावजी के जयकारों से गूंजता रहा। स्नान के बाद पीठाधीश्वर ने पहले के महंतों तथा भगवान का स्मरण कर कुछ श्रीफल आबूदर्रा जल तीर्थ में उछाले, जिन्हें पाने के लिए भक्तों में होड़ मची रही। भक्तों ने गहरे पानी में तैर कर श्रीफल निकाले तथा प्रसाद वितरित किया। महंतश्री ने दोनों हाथ ऊँचे कर पवित्र स्नान करने वाले हजारों भक्तों को पवित्रता व दिव्यता के साथ जीवन जीने का आशीर्वाद दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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