कृतज्ञ राष्ट्र ने बापू को याद किया (लीड-1)
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित तमाम वरिष्ठ नेताओं ने राजघाट स्थित बापू की समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनकी समाधि राजघाट पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए और राजघाट समाधि समिति ने सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित की। एक घंटे से ज्यादा देर तक चली इस प्रार्थना सभा में बौद्ध, जैन, बहाइ, ईसाई, हिंदू, इस्लाम, यहूदी, पारसी तथा सिख धर्मो के धार्मिक नेताओं ने शिरकत की।
राजघाट समाधि समिति के सदस्य रजनीश कुमार ने बताया, "हर साल शहीदी दिवस के मौके पर बापू को श्रद्धांजलि देने के लिए हम सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन करते हैं। यह साल भी अपवाद नहीं रहा। रक्षा मंत्रालय भी इस मौके पर विशेष श्रद्धांजलि समारोह आयोजित करता है।"
प्रार्थना सभा के अलावा भक्ति संगीत का भी आयोजन किया गया। गांधी स्मृति की ओर से भी विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
उल्लेखनीय है कि महात्मा गांधी की हत्या के छह दशक गुजरने के बावजूद उनके दर्शन और विचार पूरी दुनिया में लोगों को आकर्षित करते हैं। हजारों लोग रोजाना राजघाट स्थित उनकी समाधि पर आते हैं।
शनिवार को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने आने वाले अति विशिष्ट जनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षाकर्मियों के राजघाट को बंद करने से कई लोगों को निराश भी होना पड़ा।
बोस्टन की एक फिजीशियन मीना सुंदरम ने आईएएनएस से कहा, "गांधीजी महान व्यक्ति थे और पूरी दुनिया में उनका सम्मान है। हमारा बेटा अनीश उन पर एक प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है। हम यहां विशेष रूप से इसलिए आए थे कि वह राजघाट को देख सके।"
अधिकारियों के अनुसार प्रतिदिन करीब 10,000 लोग राजघाट पहुंचते हैं और सप्ताहांत में उनकी संख्या 20,000 होती है।
आस्ट्रेलिया से अपने पति और बेटे सुधीर के साथ राजघाट आई एक अन्य प्रवासी पर्यटक बानू रासकुट्टी ने कहा, "दिल्ली में राजघाट मेरा सबसे पंसदीदा स्थान है। जब भी मैं यहां आती हूं मुझे बहुत शांति महसूस होती है।"
जर्मनी के एक अध्यापक एपलेट सेगबर्ट 28 लोगों के समूह के साथ भारत दौरे पर आए हैं। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास उनके लिए हमेशा रुचिकर रहा है।
सेगबर्ट ने कहा, "मैंने गांधीजी के विचारों और दर्शन का अध्ययन किया। मैं यहां आना चाहता था।"
अपनी पत्नी के साथ राजघाट पहुंचे दिल्लीवासी महेश सोनी ने कहा, "हर कोई माल्स, बाजार या पार्को में जाता है लेकिन गांधीजी जैसे महान नेताओं को सम्मान देने के लिए भी समय निकालना चाहिए। लोगों को यहां आकर उनका सम्मान करना चाहिए। मैं जब भी यहां आता हूं बहुत अच्छा महसूस करता हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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