स्वतंत्रता सेनानियों को पेंशन पर लाल फीताशाही से सर्वोच्च न्यायालय व्यथित

नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। देश के 61वें गणतंत्र दिवस के एक दिन बाद सर्वोच्च न्यायालय ने प्रमाणित स्वतंत्रता सेनानियों को पेंशन देने में सरकारी अनिच्छा और लाल फीताशाही पर खेद जाहिर किया।

ए.मणीक्कम पिल्लई को स्वतंत्रता सेनानी की पेंशन देने के मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की अपील को खारिज करते हुए न्यायाधीश हरजीत सिंह बेदी और टी.एस.ठाकुर की खंडपीठ ने कहा, "यह अपील एक उदाहरण है कि हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों से कैसा व्यवहार करते हैं। यद्यपि हम स्वतंत्रता संघर्ष में उनके योगदान की प्रशंसा करते हैं, हम उनको पेंशन देने से मना करते हैं।"

स्वतंत्रता सेनानियों की व्यथा का उल्लेख करते हुए खंडपीठ ने बुधवार को कहा, "पेंशन में मिलने वाली राशि बहुत मामूली है और जबकि कई लोग वित्तीय कठिनाइयों में हैं, बिना किसी अपवाद के यह सम्मान का एक प्रतीक और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान की स्वीकृति है।"

तमिलनाडु सरकार ने मद्रास उच्च न्यायालय के 26 जून 2006 को दिए गए फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी। उच्च न्यायालय ने पिल्लई को पेंशन देने का आदेश दिया था।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि दो जिला अधिकारियों और एक जिला स्तरीय जांच समिति ने ब्रिटिश शासन काल के दौरान पिल्लई के जेल जाने की पुष्टि की।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य सरकार ने भी पिल्लई के स्वतंत्रता सेनानी होने से इंकार नहीं किया लेकिन इस आधार पर उनको पेंशन देने से इंकार किया कि अपने आवेदन में उन्होंने अपने एक सहकैदी से हासिल प्रमाण-पत्र नहीं लगाया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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