बधिरों को ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने पर विचार
सरकार के इस कदम के बारे में अधिवक्ता ज्योति सिंह ने इस सप्ताह के प्रारंभ में दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया था।
मुख्य न्यायाधीश अजीत प्रकाश शाह और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ की खण्डपीठ को सरकार के इस कदम के बारे में सूचित करते हुए सिंह ने कहा, "हम स्वास्थ्य विशेषज्ञों से मशविरा कर रहे हैं और इस बारे में एक अध्ययन किया जा रहा है कि बधिर होना ड्राइविंग को कितना प्रभावित कर सकता है। पूर्व के अध्ययन बताते हैं कि बधिरों के पास ड्राइविंग के समय निर्णय लेने की समझ होती है।"
सिंह ने कहा, "यद्यपि तकनीकी विशेषज्ञ बधिरों को ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के हमारे कदम से सहमत नहीं हैं, लेकिन हम अभी भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों से इस मुद्दे पर मशविरा करने की कोशिश कर रहे हैं।"
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और स्वास्थ्य विभाग फिलहाल इस मामले की समीक्षा कर रहे हैं। खण्डपीठ ने कहा, "यह एक सकारात्मक दृष्टि है। कम से कम अब इस पूरे मामले पर फिर से विचार तो किया जा रहा है।"
फिलहाल, मोटर व्हिकल्स कानून बधिरों को ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से रोकता है।
अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह 17 फरवरी तक अपना अंतिम रिपोर्ट जमा कराए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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