ग्लेशियर पिघलने की गलत घोषणा के लिए इस्तीफा नहीं देंगे पचौरी (लीड-1)
यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में एक बार फिर अपनी गलती स्वीकार करते हुए पचौरी ने कहा कि रिपोर्ट के इस अंतिम निष्कर्ष को नकारा नहीं जा सकता कि हिमालयी ग्लेशियर पिघल रहे हैं।
पचौरी ने कहा, "अपने पद से इस्तीफा देने का मेरा कोई इरादा नहीं है। मेरा चयन सभी देशों द्वारा किया गया था और मैं जलवायु परिवर्तन पर आईपीसीसी की पांचवी आंकलन रिपोर्ट को पूरा करूंगा।" पांचवी रिपोर्ट 2013 में आने वाली है।
इस प्रश्न पर कि इस गलत घोषणा के कारण आईपीसीसी की विश्वसनीयता तो प्रभावित हुई है, पचौरी ने कहा, "बौद्धिक लोग मुद्दे को व्यापक तौर पर देखते हैं। और मुझे भरोसा है कि दुनिया के नेता आईपीसीसी में अपना भरोसा कायम रखेंगे और वे इससे मुंह नहीं मोड़ेंगे।"
आईपीसीसी की 2007 की चौथी आंकलन रिपोर्ट की पूरी तरह समीक्षा किए जाने की आवश्यकता संबंधी सवाल पर पचौरी ने कहा, "आप हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने की गलत घोषणा के आधार पर पूरी रिपोर्ट को गलत नहीं करार दे सकते। हमारी प्रक्रिया पुख्ता है और वह आईपीसी की प्रक्रिया के अनुकूल है।"
पचौरी ने आगे कहा, "वास्तव में इस बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है कि हिमालयी ग्लेशियर किस दर से पिघल रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत में या दक्षेस (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) देशों में ग्लेशियर पिघलने के मुद्दे पर कोई अनुसंधान नहीं हो रहा है। हमें ग्लेशियरों के पिघलने की सही गणना और मूल्यांकन के लिए एक योजना बनानी चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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