हर-हर गंगे!

हर-हर गंगे!

शालिनी जोशी

देहरादून से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

लाखों लोगों की आस्था और भक्ति का संगम महाकुंभ हरिद्वार में शुरू हो गया है. देश-दुनिया के विभिन्न भागों से लाखों की संख्या में लोग पुण्य प्राप्ति के लिये गंगा में स्नान कर रहे हैं.

नमामि गंगे...हर-हर गंगे ...गंगा मैया की जय...हर की पैड़ी भाव-विभोर होकर स्नान कर रहे लोगों के उद्गार से गूंज रही है. क्या बड़े क्या बूढ़े और क्या महिलाएं, लोगों की भीड़ करोड़ो लोगों की आस्था और भक्ति का संगम महाकुंभ हरिद्वार में शुरू हो गया.

आधी रात को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही महाकुंभ का मुहूर्त शुरू हो गया. कड़ाके की ठंड के बावजूद तड़के ही लोगों ने हर की पैड़ी पंहुचना शुरू कर दिया.

कोई यहां आत्मिक शुद्धि के लिये आया है,कोई मोक्ष की कामना से, कोई पुण्य प्राप्ति के लिये तो कोई धार्मिक दीक्षा लेने.

पटियाला से आई महंत ज्वालापुरी कहती हैं,"हम यहां संतों के दर्शन करने आते हैं उनका आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं. संतों के स्नान से जूठे हुए पानी में जितना स्नान करेंगें हमें उतना ही पुण्य प्राप्त होगा".

अप्रत्याशित रूप से आज मौसम भी अचानक ही मेहरबान हो उठा.कई दिनों से घने कोहरे में लिपटे हरिद्वार में आज सूरज चमक रहा है और शायद इससे लोगों का उत्साह और भी बढ़ गया है.

गुजरात के कच्छ इलाके से आए 68 साल के विनय भट्ट कहते हैं, “गंगा मैया में हमारी श्रद्धा है . इनसे बढ़कर मां औऱ कौन हो सकती है. हम यहां आकर धन्य हो गए.”

महाकुंभ में बड़ी संख्या में विदेशी भी नजर आ रहे हैं जिनके लिये ये आध्यात्म और कौतुक का मिला-जुला मेला है. जर्मनी से आई लिली क्रिस कहती हैं, “मेरी आत्मा निर्मल हो गई मैं बता नहीं सकती मुझे यहां आकर कितनी प्रसन्नता हो रही है.”

श्रद्धालुओं के उत्साह के सामने व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन को खासी कसरत करनी पड़ रही है.वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुंभ अजय रौतेला कहते हैं,”हर की पैड़ी की सुरक्षा अर्धसैनिक बलों के हवाले कर दी गई है. लगातार चैकिंग औऱ निगरानी की जा रही है . इस बात का भी विशेष ख्याल रखा जा रहा है कि सुरक्षा जांच से किसी श्रद्धालुओं की भावना आहत न हो".

मेला अधिकारी आनंदवर्धन के अनुसार कुंभ मेले के पहले दिन मकर संक्राति के अवसर पर करीब 15 लाख लोगों के गंगा में स्नान करने का अनुमान है.

स्नान के अलावा कुंभ मेलों का मुख्य आकर्षण 13 प्रमुख अखाड़ों का शाही स्नान, उनकी पेशवाई,ध्वजारोहण और दीक्षा समारोह होता है.इस कुंभ में लगभग पहली बार सभी अखाड़ों में सहमति हो गई है और स्नान के क्रम तय कर दिए गए है.अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास कहते हैं,”साधु-संन्यासियों ने ही कुंभ लगाया है .सभी अखाड़े,देशभर से आए रमता पंच यहां इकठ्ठा होते हैं.धर्म पर चर्चा होती है , नये संन्यासियों को दीक्षा दी जाती है.”

14 जनवरी से 28 अप्रैल तक चलनेवाले महाकुंभ में तीन शाही स्नान होंगे.पहला शाही स्नान 12 फरवरी को शिवरात्रि के मौके पर होगा,दूसरा 15 मार्च औऱ तीसरा 14 अप्रैल को.

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