पोंगल में दिखा पारंपरिक उत्साह
चेन्नई, 14 जनवरी (आईएएनएस)। तमिलों का फसलों का त्योहार पोंगल गुरुवार को पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया।
चार दिन तक चलने वाले इस हिंदू पर्व में बारिश, सूर्य, खेत और जानवर सभी का महत्व होता है। यह त्यौहार तमिलनाडु की छोटी दीवाली जैसा ही है लेकिन इसमें आतिशबाजी नहीं होती।
राज्यभर के लोग अपने इस विशेष पर्व के लिए सुबह तड़के ही नए कपड़े पहनकर तैयार होकर मंदिरों में विशेष प्रार्थना के लिए पहुंचे।
इस अवसर पर पारंपरिक व्यंजन तैयार कर रहे लोगों के घरों के बाहर घी और तले हुए काजू की सुगंध बिखरी हुई थी। इस पर्व का विशेष व्यंजन चाकारी पोंगल है, जिसे दूध में चावल, गुड़ और बांग्ला चना को उबालकर बनाया जाता है।
इस खास व्यंजन को बनाने के दौरान जब लोग उबलते हुए दूध में कच्चे चावल और बांग्ला चना डालते हैं तो जोर-जोर से 'पोंगोलो पोंगल, पोंगोलो, पोंगल' कहते हैं।
गुड़, घी और दालों के बढ़े हुए दामों से प्रभावित हुए बिना लोगों ने त्योहार के लिए चाकारी पोंगल बनाया था।
यद्यपि एक गृहिणी रेवती वसन ने बताया कि फलों और फूलों के दामों के आसमान छूने की वजह से उन्होंने केवल भगवान पर चढ़ाने के लिए ही फूल और फल खरीदे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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