पक्षियों की लड़ाई के पारंपरिक खेल से शुरू हुआ भोगाली बिहू
सैयद जरीर हुसैन
हाजो (असम), 14 जनवरी (आईएएनएस)। असम में गुरुवार से फसलों का त्योहार भोगाली बिहू शुरू हो गया। यहां पक्षियों की लड़ाई के साथ इस पर्व की शुरुआत हुई। करीब 400 पक्षी अपने मालिकों के साथ इसमें शामिल हुए। विजेता के लिए एक ट्रॉफी और 2,001 रुपये का पुरस्कार रखा गया है।
गुवाहाटी से 30 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में सुबह से ही पक्षियों का शोरगुल शुरू हो गया था। अपने मालिकों और हजारों दर्शकों की उपस्थिति में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच करीब 400 बुलबुलें एक-दूसरे से झगड़ रही थीं।
असम में पक्षियों की लड़ाई बिहू के आयोजन का अभिन्न हिस्सा है। हाजो के स्थानीय लोग बहुत पहले से ही इस वार्षिक समारोह की तैयारियां शुरू कर देते हैं।
पक्षियों की लड़ाई का यह दो दिवसीय समारोह हयाग्रीवा माधव मंदिर परिसर में चल रहा है। विजेता बुलबुल के मालिक को एक ट्रॉफी और 2,001 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
इस समारोह के लिए दो सप्ताह पहले से ही तैयारियां शुरू हो गई थीं। लोगों ने विभिन्न तरीकों से पक्षी पकड़ना शुरू कर दिया था।
स्थानीय निवासी माधव बोरा ने बताया कि लड़ाई के लिए पक्षियों को मजबूत बनाने के लिए लोग पक्षियों को केले, जड़ी-बूटियों, काली मिर्च, लौंग और दालचीनी वाला काढ़ा पिलाते हैं। समारोह समाप्त हो जाने के बाद उन्हें खुले आकाश में छोड़ दिया जाता है।
इससे पहले दिन की शुरुआत में लोग विशेष प्रार्थनाएं करते हैं। अरुण शर्मा नाम के एक लेखक कहते हैं कि पारंपरिक व्यंजनों, मछली पकड़ने और पक्षियों व भैंसों की लड़ाई के पारंपरिक खेलों के साथ भोगाली बिहू मनाया जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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