गुआंटानामो बे को बंद करने का वादा निभा नहीं पाए हैं ओबामा
जब ओबामा ने शपथ लेने के महज दो दिन बाद इस जेल को समाप्त करने का निर्देश दिया था तो विश्व बिरादरी ने इसका जमकर स्वागत किया था।
इस कैदखाने में आतंकवाद विरोधी मुहिम के तहत पकड़े गए आतंकवादियों और संदिग्धों को रखा गया है। यहां कैदियों का घोर उत्पीड़न किए जाने के आरोप लगते रहे हैं।
ओबामा ने अपने चुनावी अभियान के दौरान बार-बार यह बयान दिया था कि गुआंटानामो के कारण अमेरिका की साख और छवि धूमिल हुई है। ओबामा के लिए इसे समाप्त करने का वादा जितना आसान था, उतना ही इस पर अमल करना कठिन साबित हुआ।
अमेरिकी अधिकारी यह स्वीकार करते हैं कि क्यूबा स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे के परिसर में बनी इस जेल को बंद करना जटिल चुनौती है, क्योंकि इसमें कई पेंच हैं।
रक्षा मंत्री रॉबर्ट गेट्स कहते हैं, "यह प्रक्रिया उम्मीद से ज्यादा जटिल है।" इस जेल में अभी करीब 200 कैदी हैं। जब से ओबामा ने सत्ता संभाली है, उनका प्रशासन बमुश्किल 40 कैदियों को उनके देश के हवाले कर पाया है।
कई देश ऐसे कैदियों को स्वीकार करने को इच्छुक नहीं है। इसे बंद करने से पहले ओबामा प्रशासन को कई कानूनी, कूटनीतिक और राजनीतिक जटिलताओं से जूझना पड़ेगा।
न्याय विभाग के नेतृत्व वाला टास्क फोर्स इन मामलों के मूल्यांकन में एक साल बिता चुका है। किन कैदियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो और किन्हें उनके मुल्क के हवाले किया जाए, यह तय करना जटिल है।
पेंटागन ने रिहाई के लिए 100 से अधिक कैदियों को चिन्हित किया है, पर चंद देश ही अपने इन संदिग्ध नागरिकों को स्वीकार करने को तैयार हैं।
हाल ही में एक अमेरिकी विमान को बम से उड़ाने की साजिश के खुलासे ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है। इस मामले में पकड़े गए एक नाइजीरियाई ने बताया कि उसने यमन में आतंकवाद का प्रशिक्षण लिया है। उल्लेखनीय है कि गुआंटानामो में बंद करीब आधे संदिग्ध यमन के हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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