परेड के दौरान गाली पर पाँच दोषी

ब्रिटेन में एक अदालत ने पाँच मुसलमानों को एक ब्रिटिश सैन्य टुकड़ी के परेड के दौरान गालियाँ देने का दोषी पाया है. इनके नाम हैं- 21 वर्षीय जलाल अहमद, 29 वर्षीय युसूफ़ बशीर, 32 वर्षीय ज़ियाउर रहमान, 31 वर्षीय शजदर चौधरी और 28 वर्षीय मुनीम अब्दुल.
ये घटना पिछले साल मार्च में ब्रिटेन के ल्यूटन शहर में हुई थी. उस समय इराक़ और अफ़गानिस्तान से लौटे स्थानीय ब्रितानी रेजिमेंट के स्वागत के लिए कई लोग इकठ्ठा हुए थे. लेकिन उसी वक्त वहाँ कुछ प्रदर्शनकारी इकठ्ठा हो गए और उन्होंने ब्रितानी फ़ौजियों को गालियाँ देनी शुरू कर दी. ये लोग हाथ में तख़्तियाँ लिए हुए थे और चिल्ला कर कह रहे थे 'ब्रितानी सैनिक नर्क में जलो".
योजना
बचाव पक्ष के वकीलों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन से पहले पुलिस के साथ अपनी योजना के बारे में बातचीत की थी और पूरी परेड के दौरान उन्होंने प्रशासन के साथ सहयोग किया.
लेकिन जज कैरोलाइन मेलनबाई के मुताबिक़ ऐसे नारे लगाना वैध प्रदर्शन की परिधि से बाहर है. जज का कहना था कि प्रदर्शनकारियों को पूरी तरह पता था कि ऐसे वाक्यों के इस्तेमाल से लोग दुखी होंगे.
जज कैरोलाइन मेलनबाई ने कहा, "मुझे कोई शक़ नहीं है कि सैनिकों को गाली देना और उनसे ये कहना कि वो नर्क में चलें जाएँ, या फिर उन्हें हत्यारे, बलात्कारी और बच्चों के हत्यारे कहना, उनकी बेइज़्ज़ती करना है. ये न सिर्फ़ उन सैनिकों की बेइज़्ज़ती है बल्कि ल्यूटन के लोगों की भी बेइज़्ज़ती है जो सैनिकों का स्वागत करने घरों से बाहर सड़कों पर निकले थे."
उधर बचाव पक्ष के वकीलों ने अपनी बात कहने की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि अगर आपके पास अपनी बात कहने का अधिकार है तो कुछ लोग आपसे सहमत होंगे और कुछ असहमत होंगे.












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