रुचिका मामला : राठौड़ को जमानत नहीं, गजेंद्र न्यायिक हिरासत में (लीड-1)
राठौड़ की ओर से उसके खिलाफ दायर किए गए नए मामलों को रद्द करने तथा अग्रिम जमानत के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कहा कि वह इस मामले में 18 जनवरी को अपना जवाब सौंपे।
न्यायमूर्ति सबीना ने अगली सुनवाई तक राठौड़ की गिरफ्तारी को रोकने के लिए उन्हें अग्रिम जमानत की अनुमति नहीं दी। सीबीआई की एक अदालत ने पिछले महीने राठौड़ को रुचिका गिरहोत्रा के साथ पंचकुला में 12 अगस्त 1990 को हुई छेड़छाड़ के मामले में छह महीने कारावास की सजा सुनाई थी।
अब सीबीआई राठौड़ को किसी भी समय गिरफ्तार कर सकती है, क्योंकि सोमवार को उसने राठौड़ के खिलाफ तीन नई प्राथमिकियां दर्ज कर ली है।
सीबीआई के वकील ने उच्च न्यायालय को बताया कि जांच एजेंसी ने इस मामले को सोमवार की शाम को ही अपने हाथों में लिया है, लिहाजा अग्रिम जमानत के लिए तथा नए मामलों को रद्द करने के लिए राठौड़ की ओर से दायर याचिका का विरोध करने के पहले उसे मामले के अध्ययन की आवश्यकता है।
राठौड़ की ओर से प्रस्तुत होते हुए उनकी वकील पत्नी आभा राठौड़ ने अग्रिम जमानत के लिए और दायर किए गए तीनों नए मामलों को रद्द करने की अदालत से मांग की। आभा ने कहा कि ये नए मामले मीडिया के दबाव में दायर किए गए हैं।
इस बीच चंडीगढ़ के जिला व सत्र न्यायालय ने राठौड़ को मिली सजा के खिलाफ दायर की गई याचिका मंगलवार को सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है।
उधर, पंचकुला की एक अदालत ने कार चोरी के आरोप में गिरफ्तार गजेंद्र सिंह को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। रुचिका मामले में सबसे पहले गजेंद्र को ही गिरफ्तार किया गया था। उसे पिछले सप्ताह पुणे से गिरफ्तार किया गया था और सोमवार शाम यहां लाया गया। मंगलवार को उसे न्यायाधीश राज गुप्ता की अदालत में पेश किया गया।
गजेंद्र ने कहा कि वह निर्दोष है और रुचिका मामले से उसका कोई लेना-देना नहीं है। उसने कहा, "मैं रुचिका के भाई आशु को जानता हूं लेकिन रुचिका मामले से मेरा संबंध नहीं है। मैं निर्दोष हूं और अदालत में इसे सिद्ध कर दूंगा।"
गजेंद्र के वकील दिनेश जागड़ा ने कहा, "गजेंद्र सिंह को कार की चोरी मामले में यहां लाया गया है। रुचिका मामले से उसका कोई संबंध नहीं है। हमें न्याय व्यवस्था में यकीन है और पुलिस मेरे मुवक्किल के खिलाफ कोई साक्ष्य पेश नहीं कर सकेगी।"
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1993 में कार चोरी के एक मामले में पुलिस ने गजेंद्र को गिरफ्तार किया था। उस वक्त उसने कहा था कि आशु भी उसके गैंग में शामिल है। इसके बाद ही आशु को गिरफ्तार किया गया था और उसके खिलाफ कार चोरी के मामले दर्ज किए गए थे।
पुलिस अधिकारियों ने सोमवार को कहा था कि गजेंद्र ने खुलासा किया है कि वह पंजाब विश्वविद्यालय में पढ़ाई करता था और इसी दौरान वह आशु से मिला था। गजेंद्र के अनुसार पैसे कमाने के लिए आशु और उसके दोस्त संजीव वर्मा ने पंचकुला और पिंजोर से कारों की चोरी की थी।
सूत्रों के अनुसार चोरी की गई कारों को बिहार में बेचा गया था। आशु ने हरियाणा पुलिस को शिकायत की थी कि पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी.एस.राठौड़ के इशारे पर ही उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
गौरतलब है कि 12 अगस्त 1990 को राठौड़ ने 14 वर्षीया रुचिका के साथ दुर्व्यवहार किया था। इसके तीन साल बाद रुचिका ने खुदखुशी कर ली थी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने पिछले दिनों रुचिका मामले में राठौड़ को छह महीने की सजा सुनाई थी लेकिन 10 मिनट के भीतर ही उसे जमानत मिल गई भी।
गत सप्ताह पंचकुला में अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश संजीव जिंदल ने राठौड़ के खिलाफ 29 दिसम्बर को दर्ज दो नई प्राथमिकियों में अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी थी।
राठौड़ के खिलाफ हत्या के लिए उकसाने, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश रचने के मामले 29 दिसम्बर को दर्ज किए गए थे। ये सभी मामले गैर जमानती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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