अदालत ने पिता-पुत्र मामले में एन. डी. तिवारी से मांगा जवाब (लीड-3)

मुख्य न्यायाधीश अजीत प्रकाश शाह और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ की खंडपीठ ने रोहित की याचिका के आधार पर 86 वर्षीय तिवारी को नोटिस जारी करते हुए उनसे नौ फरवरी तक न्यायालय में अपना पक्ष रखने को कहा है।

शेखर ने उच्च न्यायालय की एकल खंडपीठ के पिछले वर्ष नवंबर में दिए फैसले को चुनौती देते हुए यह याचिका दाखिल की है।

शेखर ने कहा, "मेरी याचिका तिवारी से कानूनी रूप से स्वीकृति प्राप्त करने के लिए है, जिन्होंने मेरे उनके बेटे होने के दावे को खारिज कर दिया है।" उन्होंने कहा कि उनकी अपील को इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि उन्होंने यह मामला काफी देरी से उठाया है। इस संबंध में शेखर ने अदालत में कई साक्ष्य पेश किए हैं।

रोहित ने कहा, "मैं पिछले 10 वर्षो से मस्तिष्काघात से पीड़ित था और इस दौरान मुझे हृदयघात भी हुआ, जिस वजह से अदालत आने में देरी हुई। अदालत को इन सच्चाइयों को निश्चित तौर पर स्वीकार करना चाहिए। मुझे सुनवाई का मौका मिलना चाहिए। मुझे यह साबित करने का भी मौका मिलना चाहिए कि इस मामले में मैंने देरी क्यों की।"

एकल खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट तौर पर कहा था कि एक व्यक्ति बालिग होने के तीन साल के भीतर पुत्र होने संबंधी दावा कर सकता है।

शेखर के मुताबिक तिवारी ने उसे और उसकी मां उज्जवला शर्मा को 1995 के बाद से दरकिनार करना शुरू किया और वह शेखर से दिल्ली या उत्तरांचल के अपने आवास पर मिलने से इंकार करते रहे।

उज्जवला शर्मा ने कहा, "पितृत्व के मामले को कानून के दायरे में नहीं बांधा जा सकता।"

शर्मा के मुताबिक तिवारी उन्हें और शेखर को पत्नी और बेटे के रूप में स्वीकार करते थे लेकिन 2005 में उन्होंने उन दोनों की ओर ध्यान देना बंद कर दिया तो उन्हें पता चला कि वह झूठा आश्वासन देते रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

*

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+