भारतीय मूल के अमेरिकी ने 17.5 लाख डॉलर में दी थी गोपनीय जानकारियां
कुमार ने यह बयान उस समय दिया, जब गुरुवार को मैनहट्टन की संघीय अदालत में उसे प्रतिभूति घोटाले के लिए दोषी ठहराया गया। अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने इसे अमेरिका के इतिहास में हेज फंड में सबसे बड़े अनधिकृत व्यापार का मामला बताया है।
इस मामले में दोषी ठहराए जाने वाले अनिल कुमार सातवें व्यक्ति हैं। अभियोजन पक्ष ने कहा कि राजारतनाम ने अनिल कुमार से 2003 के अंत में या 2004 के प्रारंभ में संपर्क किया था और उन कंपनियों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक साल में 500,000 डॉलर देने का प्रस्ताव दिया था, जिन कंपनियों तक मैक्किनसे के माध्यम से कुमार की पहुंच थी।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि राजारतनाम द्वारा अनिल कुमार को भुगतान की गई राशि स्विस बैंक के एक खाते में जमा कराई गई। उसमें से कुछ राशि गैलॉन के साथ एक खाते के जरिए अनिल कुमार के नाम से फिर से निवेश की गई। अनिल कुमार को प्रत्यक्ष रूप से 17.5 लाख डॉलर का भुगतान किया गया, जबकि कथित गैलॉन योजना के साथ संलिप्तता के जरिए उसने कुल 26 लाख डॉलर की कमाई की थी।
न्यायाधीश डेन्नी चिन के समक्ष पेश होते हुए अनिल कुमार ने अपने सहकर्मियों और मित्रों से माफी मांगी, क्योंकि उसके कारण उन लोगों को शर्मिदगी का सामना करना पड़ा है। उसने कहा, "जिन सहकर्मियों ने मुझ पर भरोसा किया और मैंने उनके भरोसे को तोड़ा है, उन सभी से मैं माफी मांगता हूं।"
अनिल कुमार को 26 मार्च को सजा सुनाए जाने के बाद 25 वर्ष तक कारावास की सजा भुगतनी पड़ सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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