नई अमेरिकी सुरक्षा प्रक्रियाओं के प्रति चिंतित हैं दक्षिण एशियाई संगठन
वाशिंगटन, 7 जनवरी (आईएएनएस)। कई दक्षिण एशियाई संगठनों ने अमेरिका पहुंचने वाले हवाई यात्रियों के लिए बने नए जांच मानकों के प्रति गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इससे विभिन्न देशों और विभिन्न धर्मो को मानने वाले लोगों में धार्मिक और नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा।
क्रिसमस के दिन अमेरिकी एयरलाइन पर आतंकवादी हमले की कोशिश के बाद परिवहन सुरक्षा प्रशासन (टीएसए) द्वारा घोषित की गई नई प्रक्रिया में अमेरिका पहुंचने वाले 14 देशों के हवाई यात्रियों को गहन सुरक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसमें उनकी शारीरिक जांच और उनके सामान की जांच शामिल होगी।
जांच के तहत आने वाले देशों की सूची में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, अल्जीरिया, क्यूबा, इराक, ईरान, लेबनान, लीबिया, नाइजीरिया, सउदी अरब, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन शामिल हैं।
दक्षिण एशियाई संगठनों ने एक संयुक्त वक्तव्य में कहा है, "नए मानक निस्संदेह मुस्लिम बहुल देशों को लक्ष्य करते हुए बनाए गए हैं। नए मानकों में सुरक्षा नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने की बजाए लोगों की अतिरिक्त जांच के लिए उनका रंग, धर्म और देश को लक्ष्य किया गया है।"
उनका कहना है, "इसके अलावा ये सुरक्षा उपाय इन समुदायों से सुरक्षा को खतरे की गलत धारणाओं को बढ़ावा देंगे और इससे नागरिक अधिकारों और समानता को सुनिश्चित न कर सकी अमेरिकी सरकार की प्रतिष्ठा को घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुंचेगा।"
जिन संगठनों ने यह बयान दिया है उनमें छाया सीडीसी, कूने आइजलैंड एवेन्यू प्रोजेक्ट, मैत्री, शक्ति पीयर ग्रुप, द सिख कोएलिशन, साउथ एशियन अमेरिकन्स लीडिंग टुगेदर (एसएएएलटी), साउथ एशियन नेटवर्क और युनाइटेड सिख शामिल हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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