भारत के व्यावसायिक छात्रों को आस्ट्रेलिया में अधिक समस्या : रवि
पिछले सप्ताह दो भारतीय छात्रों की विक्टोरिया प्रांत में हुई हत्या की पृष्ठभूमि में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में रवि ने कहा, "विश्वविद्यालय परिसरों में रहने वाले छात्रों को अधिक समस्या नहीं आती। वीईटी केंद्रों को जाने वाले छात्रों को अधिक समस्या का सामना करना पड़ता है।"
आस्ट्रेलिया में वीईटी व्यवस्था के तहत विदेशी छात्र प्रशिक्षु के रूप में सरकारी मान्यता प्राप्त कई व्यावसायिक केंद्रों में प्रवेश ले सकते हैं। नियोक्ताओं और प्रशिक्षुओं में कानूनी समझौता होता है और प्रशिक्षु को वेतन दिया जाता है।
परंतु मंत्री के अनुसार कई मामलों में प्रशिक्षण कार्यक्रम खत्म होने के बाद शोषण होता है।
रवि ने कहा कि आस्ट्रेलिया में सरकार स्वयं कई वीईटी केंद्रों को बंद करने पर बाध्य हुई है।
उन्होंने बताया कि कई मामलों में इन केंद्रों में केवल एक कमरा होता है। वे केवल वीजा जारी करते हैं। प्रशिक्षुओं को सप्ताह में 20 घंटे कार्य करने का प्रस्ताव दिया जाता है और वे एक घंटे में 15 डॉलर कमा सकते हैं। यह एक अच्छी रकम है।
परंतु रवि ने कहा कि प्रशिक्षुओं का शोषण होता है। नियोक्ता उनको एक घंटे का केवल पांच डॉलर देते हैं, यह बहुत बड़ा शोषण है।
मंत्री ने कहा कि भारत को आशा है कि आस्ट्रेलिया का श्रम मंत्रालय हस्तक्षेप करेगा और सुनिश्चित करेगा कि भारतीयों का शोषण न हो।
रवि ने कहा कि पिछले पांच वर्षो में आस्ट्रेलिया जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या करीब 19,000 से बढ़कर 100,000 से अधिक हो गई।
परंतु उन्होंने कहा कि कई वीईटी केंद्रों के बंद होने से इस संख्या में काफी गिरावट आई है।
रवि ने कहा कि विक्टोरिया प्रांत की कार्यवाहक प्रधानमंत्री जुलिया गिलार्ड का एक पत्र बुधवार को उनको मिला है। भारतीयों की मौत पर उन्होंने दुख जताया है। पत्र में गिलार्ड ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस गश्त बढ़ाने और अन्य उपायों की जानकारी दी है।
रवि ने बताया कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में नस्लीय हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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