सोरेन ने विश्वास मत जीता, राजद ने किया बहिष्कार (लीड-2)
राजद के पांच विधायकों ने विश्वास मत का बहिष्कार किया जबकि चार सदस्य सदन से अनुपस्थित रहे। अनुपस्थित रहने वाले विधायकों में दो पूर्व मंत्री हरिनारायण राय और एनोस एक्का शामिल हैं जो कि इन दिनों जेल में हैं।
विश्वास प्रस्ताव उप मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पेश किया जो कि संसदीय कार्य मंत्री भी हैं। विश्वास मत पर बहस का जवाब देते हुए सोरेन ने कहा, "राज्य के विकास को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सभी की है। सरकार उचित ढंग से काम करेगी। हम एक लाख युवाओं की नौकरी सुनिश्चित करेंगे।"
विश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए उप मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा, " पृथक झारखण्ड राज्य के आंदोलन और इसके गठन से जुड़ी तीन पार्टियों ने इस सरकार का गठन किया है। झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) व ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) ने पृथक राज्य के आंदोलन में हिस्सा लिया था और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने झारखण्ड का निर्माण किया था।"
झामुमो अध्यक्ष सोरेन 30 दिसंबर को राज्य के सातवें मुख्यमंत्री बने। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), आजसू और जनता दल (युनाइटेड) के सहयोग से सरकार का गठन किया था। भाजपा और झामुमो के 18-18 विधायक हैं जबकि एजेएसयू के पांच और जद-यू के दो विधायक हैं। इस तरह 81 सदस्यीय विधानसभा सभा में सोरेन समर्थक दलों के 43 विधायक हैं।
तीन निर्दलीय विधायकों ने भी सोरेन को समर्थन दिया है जिससे विधानसभा में उनके समर्थकों की संख्या 46 हो गई है। सोरेन फिलहाल लोकसभा के सदस्य हैं और उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा चुनाव जीतना होगा।
विश्वास मत के दौरान राजद के बहिष्कार से सोरेन की मुश्किलें आसान हो गईं। विश्वास मत का बहिष्कार करने के मुद्दे पर राजद की विधायक अन्नपूर्णा देवी ने कहा, "शिबू सोरेन धर्मनिरपेक्ष नेता हैं। झामुमो-भाजपा सरकार बनने के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। राज्य में धर्मनिरपेक्ष सरकार के गठन के लिए कांग्रेस ने गंभीरता नहीं दिखाई।" अपना वक्तव्य खत्म करने बाद अन्नपूर्णा देवी राजद के अन्य विधायकों के साथ सदन से बाहर चली गईं।
झारखण्ड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक के विधायक प्रदीप यादव ने इस सरकार को अवसरवादी करार देते हुए कहा कि सोरेन की सरकार 'राम' और 'रावण' की सरकार है। भाजपा का विश्वास राम में है जबकि शिबू सोरेन कह चुके हैं कि रावण उनके पूर्वज हैं।
राज्यपाल के. शंकरनारायणन ने सोरेन सरकार को आठ जनवरी तक सदन में विश्वास मत हासिल करने को कहा था।
विधानसभा का विशेष सत्र चार जनवरी से शुरू हुआ और बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव किया गया। भाजपा के सी.पी. सिंह सर्वसम्मति से विधानसभा अध्यक्ष चुने गए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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