कुछ पक्षी अजनबी हमलावरों से निपटने के लिए एंटीबॉडी विकसित करते हैं

उताह विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के मुताबिक इस द्वीप पर पाए जाने वाले फिंच पक्षियों(तूती) ने दो परजीवियों से निपटने के लिए एंटीबॉडी विकसित कर लिए थे। उल्लेखनीय है कि महान वैज्ञानिक डार्विन ने भी इस प्रजाति को शोध का विषय बनाया था।

शोधकर्ताओं के अनुसार जब दो प्रजातियों के परजीवियों ने इस द्वीप को अपना अड्डा बनाया तो यहां के कई पक्षियों ने इस खतरे से निपटने के लिए एंटीबॉडी विकसित कर लिए। इनमें से एक परजीवी पॉक्स वायरस था जबकि दूसरा परजीवी एक खास तरह की मक्खी थी। इसे नेस्ट फ्लाई कहा जाता है।

शोधकर्ता डेल क्लायटन के मुताबिक इस द्वीप पर किसी भी पक्षी प्रजाति के विलुप्तप्राय नहीं होने की यह खास वजह है। वैसे, उनका यह भी कहना है कि इस प्रक्रिया से पक्षियों को नुकसान भी पहुंचा होगा, क्योंकि एंटीबॉडी पैदा करने से कई तरह की बीमारियां एवं एलर्जी भी होती हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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