अंतरिक्ष विज्ञान के सम्मुख नौ बड़ी चुनौतियां : प्रो. राव
प्रो. राव ने कहा कि खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण सुरक्षा, संसाधन सुरक्षा, अंतरिक्ष सुरक्षा, अंतरिक्ष परिवहन, जीवन की खोज, ब्रह्मांड का अन्वेषण तथा मंगल पर आवास अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र की नौ बड़ी चुनौतियां हैं।
उन्होंने कहा कि बढ़ती खाद्य आवश्यकता के मद्देनजर खाद्य उत्पादकता मौजूदा 1.7 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 2050 तक 4 टन प्रति हेक्टेयर करना होगी। इसके लिए जीव विज्ञान के साथ अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की मदद से दूसरी हरित क्रांति लानी होगी। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी मौसम पूर्वानुमान के लिए इस्तेमाल की जा सकती है, जिससे आपदा के दुष्प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।
दरअसल, 50 वर्ष पहले पूर्व सोवियत संघ से स्पूतनिक-1 के प्रक्षेपण के साथ ही अंतरिक्ष युग शुरू हुआ था। तब से बहुत सारे उपग्रह प्रक्षेपित किए जा चुके हैं। 1989 में प्रक्षेपित कास्मिक बैकग्राउंड रेडिएशन एक्सप्लोरर ने बिगबैंग थ्योरी के अनुमानों की पुष्टि की थी। विल्िंकसन माइक्रोवेब एनिसोट्रोपी और हाल में प्रक्षेपित हेर्सचेल तथा प्लांक उपग्रहों ने ब्रह्मांड के अध्ययन में काफी योगदान दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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