आरक्षण पर गहलोत-वसुंधरा आमने सामने, बैंसला ने भी ताल ठोकी

मुख्यमंत्री ने बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में आरक्षण के मामले में अदालती रोक के कारण विभिन्न सरकारी नौकरियों में अटकी हुई भर्ती प्रक्रिया को शुरू करने का फैसला किया था, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पंचायत चुनावों में राजनीतिक फायदा लेने की कांग्रेस की चाल बताया।

इस बीच गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने भी मंत्रिमंडल के फैसले को गुर्जरों के खिलाफ बताया है। बैंसला ने कहा कि सरकार ने यदि इस मसले पर राजनीति छोड़कर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की तो गुर्जर फिर से आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।

वसुंधरा राजे ने आरक्षण मामले में सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि गहलोत सरकार आरक्षण के नाम पर लोगों को लुभाना चाहती है और इसीलिए इस तरह का फैसला किया गया है। राजे का कहना है कि गहलोत की कांग्रेस सरकार न आरक्षण देने वाली है और न ही नौकरी। आरक्षण पर सरकार की नियत साफ नहीं है। यदि सरकार की नियत साफ होती तो वह आरक्षण विधेयक 2008 को नौवीं अनुसूची में डलवाती।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वसुंधरा राजे के बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के आरक्षण प्रस्ताव के लिए अब संविधान की नौवीं अनुसूची के कोई मायने नहीं है। गहलोत ने वसुंधरा के बयान को जानकारी के अभाव में दिया गया बताया है। उन्होंने कहा वसुंधरा को चाहिए कि आरोप लगाने से पहले पूरी जानकारी रखें। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि आरक्षण मामले में अब सर्वोच्च न्यायालय समीक्षा कर सकता है।

उल्लेखनीय है कि गहलोत मंत्रिमंडल ने आरक्षण मामले में उच्च न्यायालय की रोक के कारण सरकारी नौकरियों में अटकी भर्तियों में आरक्षण की पुरानी व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। मंत्रीमंडल की बैठक में बुधवार को यह फैसला किया गया। गहलोत सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह भर्तियां अंतरिम होंगी और उच्च न्यायालय के फैसले के बाद इन पर असर पड़ सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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