नेपाल में सैकड़ों माओवादी बाल छापामार आजाद
सैकड़ों बाल छापामारों को आम जिंदगी जीने के लिए इस हैसियत से मुक्त कर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसे नेपाली शांति प्रक्रिया का एक अहम पड़ाव करार दिया है। इस वैश्विक संगठन ने इसे ऐतिहासिक कदम कहा है। इन बच्चों को हरे रंग की माओवादी पोशाक त्यागकर आम नागरिक बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
काठमांडू से करीब 200 किलोमीटर दुधौली गांव में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी(पीएलए) की छावनी से विदा होते वक्त इनकी आंखों में आंसू थे। इनमें से कई अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि हथियार छोड़ने के बाद सरकार उन्हें रोजगार देने में खास दिलचस्पी नहीं लेगी।
पीएलए के उप कमांडर चंद्र प्रकाश खनल ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है। सरकार ने मदद का कोई आश्वासन नहीं दिया है और न ही इस पहल में सरकार का कोई रोल है। लेकिन हम इन बच्चों का भविष्य संवारने में पीछे नहीं रहेंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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