खेल आयोजन समितियां आरटीआई के दायरे में : अदालत
इन दोनों खेल निकायों ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी थी जिसमें कहा गया था कि दोनों निकाय आवेदक को सूचना उपलब्ध कराने के लिए बाध्य हैं। न्यायमूर्ति रविंदर भट्ट ने दोनों निकायों की अर्जी को खारिज करते हुए कहा, "चूंकि दोनों निकाय लोक प्राधिकरण हैं, इसलिए सूचना मुहैया कराना उनके लिए बाध्यकारी है। ये खेल संगठन अपने हिसाब-किताब को गोपनीय नहीं रख सकते। जनता को उनसे सूचना मांगने का अधिकार है।"
सीजीओसी का तर्क था कि वह एक स्वतंत्र एवं स्वायत्त निकाय है, इसलिए आरटीआई कानून के तहत सूचना उपलब्ध कराना उसके लिए बाध्यकारी नहीं है। दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना है कि लगभग पूरा बजटीय आवंटन उसके द्वारा किया जा रहा है, इसलिए समिति खुद को स्वतंत्र नहीं कह सकती। विवाद तब शुरू हुआ जब एक व्यक्ति ने आवेदन देकर यह जानना चाहा कि मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों के समापन के मौके पर ऐश्वर्या राय और सैफ अली खान जैसे सितारों को मेलबर्न ले जाने के लिए कितनी रकम खर्च की गई। तब सीआईसी ने खुद को स्वतंत्र निकाय बताकर इससे पल्ला झाड़ लिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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