राठौड़ की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित (लीड-1)

पंचकुला के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव जिंदल ने गुरुवार को हरियाणा के पूर्व पुलिस प्रमुख एस.पी.एस. राठौड़ की अग्रिम जमानत अर्जी पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। राठौड़ ने 29 दिसम्बर को अपने खिलाफ दर्ज दो नई प्राथमिकियों में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी।

अदालत ने इस मामले पर करीब दो घंटे तक दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद अपना फैसला शुक्रवार तक के लिए सुरक्षित रख लिया।

उधर, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश मुकुल मुदगल की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने एक वकील व मानवाधिकार कार्यकर्ता रंजन लखनपाल की जनहित याचिका पर केंद्र व हरियाणा सरकार, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और राठौर को नोटिस जारी किए हैं। याचिका में 1993 में कथित तौर पर रुचिका को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले राठौर पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 305 (एक किशोरी को आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध) के तहत मामला दर्ज करने की बात कही गई है।

उच्च न्यायालय इस मामले में 27 जनवरी को सुनवाई करेगा।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने 15 वर्षीय रुचिका गिरहोत्रा दुर्व्यवहार मामले में 21 दिसम्बर को राठौड़ को दोषी पाया था और उसे छह महीने कैद की सजा सुनाई थी। यद्यपि राठौड़ को तुरंत जमानत मिल गई थी।

राठौड़ की वकील व पत्नी आभा राठौड़ का कहना है, "उनके पास राठौर के खिलाफ लगाए गए झूठे आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं हैं। राज्य सरकार पर इन आधारहीन प्राथमिकियों को दर्ज करने का दबाव बनाने के लिए मीडिया का गलत इस्तेमाल किया गया है।" उन्होंने राठौड़ पर लगे आरोपों का खंडन किया।

शिकायतकर्ता के वकील पंकज भारद्वाज ने कहा, "यह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और आपराधिक षडयंत्र का मामला है। मीडिया के गलत इस्तेमाल का कोई सवाल ही नहीं है। 21 दिसम्बर को अदालत द्वारा राठौड़ को सजा मिलने के बाद ही मीडिया इस मामले से जुड़ा है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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