'जलवायु परिवर्तन के लिए मानव जाति है पूरी तरह जिम्मेदार'
फकीर बालाजी
तिरूवनंतपुरम, 7 जनवरी (आईएएनएस)। देश के शीर्ष कृषि वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन ने ग्लोबल वार्मिग के कारण होने वाले जलवायु परिवर्तन के लिए मानवजाति को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया है।
स्वामीनाथन ने 97वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस (आईएससी 2010) के अवसर पर गुरुवार को आईएएनएस से एक साक्षात्कार में कहा, "ग्लोबल वार्मिग मानव जनित है न कि प्राकृतिक। पृथ्वी के वातावरण में जो कुछ भी घट रहा है उसके लिए मानव पूरी तरह से जिम्मेदार है।" स्वामीनाथन को देश की पहली हरित क्रांति का जनक माना जाता है।
उन्होंने कहा, "औद्योगिक उत्पादन, परिवहन और गर्म करने के लिए पिछली दो शताब्दियों से जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल किया जा रहा है और विकसित देशों में ऐसा ज्यादा हो रहा है। परिणामस्वरूप वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैसों, खासकर कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है और पृथ्वी का तापमान एक डिग्री बढ़ गया है।"
ग्रीन हाउस गैसों के चलते जलवायु परिवर्तन होने से कृषि उत्पादकता प्रभावित हो रही है और सूखे, बाढ़ की स्थिति पैदा होने के साथ समुद्र में पानी का स्तर बढ़ रहा है।
राज्यसभा सदस्य स्वामीनाथन ने कहा कि प्रति व्यक्ति 20 टन के हिसाब से अमेरिका में भारत से 25 गुना अधिक ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। दुनिया के प्रदूषण फैलाने वाले 15 शीर्ष देशों की सूची में अमेरिका पहले स्थान पर है। सूची में अमेरिका के बाद अन्य विकसित देश और चीन हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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