थानों को आवंटित कारें इस्तेमाल कर रहे हैं गुजरात के पुलिस अधिकारी
गांधीनगर, 6 जनवरी (आईएएनएस)। गुजरात के पुलिस थानों को एक ओर जहां वाहनों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, वहीं पुलिस क्षमता में सुधार के लिए मिलने वाले केंद्रीय कोष का इस्तेमाल ऐसी लग्जरी कारों की खरीदारी पर किया जा रहा है जो कागजी तौर पर तो थानों के नाम आवंटित होती हैं, पर उनका इस्तेमाल वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अपने लिए करते हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक(कैग) की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।
गुजरात में पुलिस बल के आधुनिकीकरण की प्रदर्शन समीक्षा(एमओपीएफ) में ऐसी कई खामियों की ओर संकेत किया गया है जो पुलिस बल की क्षमता को प्रभावित कर रही हैं। मार्च 2009 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए तैयार इस रिपोर्ट को गुजरात विधान सभा के हालिया संपन्न सत्र में पेश किया गया।
केंद्र द्वारा पुलिस क्षमता में सुधार के लिए मंजूर योजना की खामियों की ओर इसमें इशारा किया गया है। इस योजना के तहत खरीदे गए 119 वाहनों को थानों और पुलिस चौकियों को आवंटित किए जाने की बजाए, पुलिस अधिकारियों को सुपुर्द कर दिया गया है।
इस आकलन रिपोर्ट में कहा गया है कि योजना का लक्ष्य पुलिस गश्त के लिए चारपहिया एवं दुपहिया वाहनों की खरीदारी करना है।
आकलन के तहत जिन 198 थानों का निरीक्षण किया गया, उनमें से 173 थानों के पास पर्याप्त संख्या में चारपहिया वाहन नहीं हैं, जबकि 109 थानों के पास पर्याप्त संख्या में दुपहिया वाहन नहीं है। 145 पुलिस थानों में से 139 के पास सिर्फ एक चारपहिया वाहन है, जबकि पांच फीसदी थानों के पास यह वाहन नहीं है। कायदे से प्रत्येक थाने के पास दो चारपहिया और तीन दुपहिया वाहन होने चाहिए।
कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने पुलिस थानों के लिए टवेरा और इंडिगो जैसे वाहनों को पुलिस गश्त के लिए उपयुक्त नहीं होने के कारण उनकी खरीदारी नहीं करने की सलाह दी थी, पर इसका उल्लंघन कर 55 टवेरा खरीदी गईं। ऐसे वाहनों की खरीदारी आला अधिकारियों की रुचियों को ध्यान में रखकर की गईं। इनका इस्तेमाल थाने नहीं, बल्कि अधिकारी करते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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