भारत घोर कृषि संकट की ओर बढ़ रहा है : एम.एस स्वामीनाथन
फकीर बालाजी
तिरुवनंतपुरम, 6 जनवरी (आईएएनएस)। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शीर्ष कृषि वैज्ञानिक एवं भारत में हरित क्रांति के प्रमुख सूत्रधारों में से एक एम.एस. स्वामीनाथन ने चेतावनी दी है कि अगर इसी तरह कृषि क्षेत्र और किसानों की अनदेखी हुई तो देश को घोर कृषि संकट का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि देश कृषि के मोर्चे पर घोर संकट की ओर बढ़ रहा है। यह त्रासदी देश में खाद्यान्न संकट का सबब बन सकती है। स्वामीनाथन ने 97 वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस में आईएएनएस के साथ एक अनौपचारिक बातचीत में कहा, "हम वाकई एक विपदा को आमंत्रित कर रहे हैं। हम संकट की ओर बढ़ रहे हैं। अगर कृषि उत्पादकता नहीं बढ़ी और किसानों की उपेक्षा होती रही तो हमें इस संकट से कोई नहीं बचा सकता।"
उन्होंने दार्शनिक लहजे में कहा कि देश का भविष्य बंदूक से नहीं, अनाज से जुड़ा है। इस शीर्ष वैज्ञानिक ने चिंता की मुद्रा में कहा, "अनाज की कीमतों में हुई भारी वृद्धि देश में कुपोषण की समस्या बढ़ाएगी। आज दाल, आलू और प्याज जैसे मूलभूत खाद्य उत्पाद थाल से गायब हो रहे हैं। अधिकांश लोग अपनी बुनियादी खाद्य जरूरतें भी पूरी करने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में कुपोषण हमारी नियति बन जाएगी।"
उनका आग्रह है कि सरकार किसानों से संबद्ध राष्ट्रीय आयोग की सिफारिशों पर अमल करे। उल्लेखनीय है कि ये सिफारिशें स्वामीनाथन की अध्यक्षता में ही की गई थीं और 2007 में संसद के पटल पर सिफारिशों के दस्तावेज को रखा गया था।
खाद्य उत्पादों के मूल्य सूचकांक में दहाई अंक की बढ़ोतरी को खतरनाक संकेत मानते हुए उन्होंने कृषि कानूनों में बदलाव पर जोर दिया। उन्होंने कृषि क्षेत्र से जुड़े मुआवजा कानूनों में बदलाव, युवाओं को कृषि क्षेत्र की ओर आकर्षित किए जाने और खेती से जुड़ी महिलाओं को बैंक ऋण मुहैया कराए जाने के कानून को उदार बनाए जाने पर जोर दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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