अदालत ने दिल्ली नगर निगम को लताड़ लगाई

नई दिल्ली, 6 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली नगर निगम को इस बात पर लताड़ लगाई कि उसने वैकल्पिक आश्रय उपलब्ध कराए बगैर एक अस्थायी रात्रि विश्रामालय को तोड़ दिया। अदालत ने कहा है कि जनता की हिफाजत करना नगर प्रशासन की जिम्मेदारी है।

मुख्य न्यायाधीश अजीत प्रकाश शाह और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ की खण्डपीठ ने करोल बाग जोन के सहायक आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह विश्रामालय को ढहाने की कार्रवाई के लिए जारी आदेश सहित गुरुवार को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हों।

दिल्ली नगर निगम के वकील संजीव सभरवाल ने अदालत को बताया कि दिल्ली नगर निगम कानून के मुताबिक अतिक्रमण हटाने के लिए किसी पूर्व नोटिस की आवश्यकता नहीं होती।

इस पर खण्डपीठ ने कहा, "आप अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। ऐसे बेसहारा लोगों की हिफाजत करना आपकी जिम्मेदारी है।"

अदालत एक अखबार में प्रकाशित उस रिपोर्ट को स्वत: संज्ञान में लेते हुए उस पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली नगर निगम द्वारा इस ढांचे को ढहाने के बाद लोगों को हो रही तकलीफों को रेखांकित किया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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