'महात्मा गांधी अफ्रीका के सपूत हैं'

नई दिल्ली, 5 जनवरी (आईएएनएस)। जाम्बिया की नेशनल एसेंबली के अध्यक्ष अमुसा के. म्वानामवाम्बवा ने कहा है कि महात्मा गांधी अफ्रीका के सपूत रहे हैं और अपने अफ्रीका प्रवास के दौरान ही वह अहिंसा के सिद्धांतों से प्रभावित हुए थे।

म्वानामवाम्बवा ने राष्ट्र मंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (सीएसपीओसी) के मौके पर मंगलवार को आईएएनएस से कहा, "महात्मा गांधी अफ्रीका के सपूत हैं। भारत के साथ हम भी महात्मा गांधी की विरासत में साझेदार हैं।"

जाम्बियाई नेता ने महात्मा गांधी के एक छायाचित्र के पास खड़े होकर उसके नीचे लिखे वाक्यों को पढ़ने के बाद कहा, "इस पर दावा करने का हमें भी समान रूप से अधिकार है।"

वह लोकसभा सचिवालय द्वारा संसदीय लोकतंत्र पर विज्ञान भवन में आयोजित एक प्रदर्शनी का अवलोकन रहे थे। इस दौरान महात्मा गांधी के एक छाया चित्र के सामने आकर वह ठिठक गए। छाया चित्र के नीचे महात्मा गांधी के कहे शब्द लिखे हुए थे। वे शब्द कुछ इस तरह थे, "लोकतंत्र से मेरा अभिप्राय यह है कि इसके साये में सबसे कमजोर को भी वही अवसर उपलब्ध होने चाहिए, जो सबसे ताकतवर व्यक्ति को उपलब्ध हो। यह व्यवस्था अहिंसा के बगैर नहीं कायम हो सकती।"

म्वानामवाम्बवा ने कहा कि महात्मा गांधी अहिंसा के सिद्धांत से अफ्रीका महाद्वीप में ही प्रभावित हुए थे। गांधी के शुरुआती जीवन का काफी हिस्सा अफ्रीका में बीता था।

उन्होंने कहा, "क्षमा करना अफ्रीका और भारत के लोगों का बुनियादी स्वभाव है।"

म्वानामवाम्बवा ने कहा कि अहिंसा के बारे में गांधीजी की शिक्षाओं ने जाम्बिया के स्वतंत्रता आंदोलन को भी प्रभावित किया था। जाम्बिया 1964 में स्वतंत्र हुआ था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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