सेंसेक्स में अंतिम दिन भी वृद्धि

वर्ष 2009 के अंतिम कारोबारी सत्र में मुंबई शेयर बाज़ार का संवेदी सूचकांक 121 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ है.
जहाँ तक पूरे साल की बात है तो भारत के प्रमुख शेयर सूचकांक सेंसेक्स में साल में क़रीब 82 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी देखी गई.
इससे पहले 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट के माहौल में सेंसेक्स में अभूतपूर्व गिरावट आई थी.
माना जाता है कि यूपीए के दोबारा सत्ता में आने और वित्तीय संकट के असर कम होने से भारतीय शेयर बाज़ार के लिए 2009 बेहतर रहा.
वर्ष 2009 के अंतिम कारोबारी दिन सेंसेक्स 139 अंकों की रैली के साथ खुला. दिन में एक बार सूचकांक 17,530.94 के स्तर पर पहुँच गया, लेकिन अंतत: 120.99 अंक की तेज़ी के साथ 17,464.81 अंकों पर बंद हुआ.
विश्लेषकों का कहना है कि सत्र के अंत में मुद्रास्फीति के ताज़ा आंकड़ो के असर से सेंसेक्स की उड़ान थोड़ी धीमी पड़ गई. उल्लेखनीय है कि खाद्य पदार्थों की महंगाई की दर 20 प्रतिशत तक पहुँच गई है.
सेंसेक्स की उड़ान को हवा मिली मुख्यत: मशीनरी और रिफ़ाइनरी से जुड़े शेयरों में तेज़ी से.
निफ़्टी में भी तेज़ी भारत के एक अन्य प्रमुख शेयर सूचकांक निफ़्टी 50 में भी आख़िरी दिन बढ़ोत्तरी का रुख रहा. बाज़ार बंद होते समय यह सूचकांक 31.60 अंकों की तेज़ी के साथ 5201.05 के स्तर पर था.
31 दिसंबर को एक बार तो निफ़्टी का सूचकांक 5221.85 तक पहुँच गया था.
निफ़्टी की बढ़त में मुख्य योगदान बिजली क्षेत्र के शेयरों की तेज़ी का रहा.
कारोबारियों को इन रिपोर्टों से भी प्रोत्साहन मिला कि सरकार ऊर्जा क्षेत्र के उपक्रमों में 10 प्रतिशत विनिवेश का फ़ैसला कर सकती है.












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