भारत ने जापान से कहा, पहले अमेरिका, चीन सीटीबीटी पर हस्ताक्षर करे (लीड-3)

जापान ने हालांकि भविष्य में महत्वपूर्ण एजेंडा बनने जा रहे नागरिक परमाणु सहयोग और उच्च तकनीक व्यापार के लिए अपने दरवाजे खुले रखे हैं।

भारत के दौरे पर आए जापानी प्रधानमंत्री युकियो हातोयामा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ कई द्विपक्षीय मुद्दों पर मंगलवार को व्यापक चर्चा की। इस चर्चा के प्रमुख मुद्दों में नागरिक परमाणु सहयोग भी शामिल था।

भारत और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई सहित सुरक्षा वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए एक कार्य योजना भी तैयार की। दोनों देशों ने महत्वपूर्ण आर्थिक समझौते पर आगे बढ़ने का भी फैसला किया है लेकिन असैन्य परमाणु सहयोग के क्षेत्र में कोई खास सफलता नहीं मिली।

मनमोहन सिंह ने जापानी प्रधानमंत्री के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने, सुरक्षा वार्ता का स्तर ऊंचा करने, संयुक्त राष्ट्र सुधारों, आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और परमाणु अप्रसार सहित अनेक द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की।

वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने 'भारत-जापान रणनीतिक और वैश्विक समझौते का नया स्तर' शीर्षक वाले एक महत्वाकांक्षी संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसके केंद्र में सुरक्षा सहयोग पर एक कार्य योजना तैयार करना है।

वार्ता के बाद एक मनमोहन सिंह के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में जापान के प्रधानमंत्री युकियो हातोयामा ने कहा, "मैं आशा करता हूं कि भारत सीटीबीटी पर हस्ताक्षर करेगा और उसे मान्यता देगा।"

हातोयामा ने कहा, "इसके जवाब में प्रधानमंत्री (मनमोहन सिंह) ने कहा कि पहले अमेरिका और चीन को इस पर हस्ताक्षर करने चाहिए, इससे नई स्थिति तैयार होगी।"

जापानी प्रधानमंत्री ने कहा, "मेरा मानना है कि भारतीय प्रधानमंत्री ने सही फरमाया है। हमें इसके लिए काम करना होगा। हमने नागरिक परमाणु सहयोग पर भी चर्चा की। यह भविष्य में बहुत महत्वपूर्ण एजेंडा बनेगा।"

मनमोहन सिंह ने परमाणु अप्रसार के भारत के त्रुटिहीन रिकार्ड का उल्लेख किया और जापान के साथ नागरिक परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

हातोयामा के पहले भारत दौरे का मकसद द्विपक्षीय सुरक्षा और आर्थिक भागीदारी को मजबूत करना है।

इस अवसर पर मनमनोहन सिंह ने कहा, "प्रधानमंत्री हातोयामा का दौरा हमारी साझेदारी को नए स्तर तक ले जाने में सफल रहा है। यह इस संयुक्त बयान में प्रदर्शित होता है जिस पर हमने अभी-अभी हस्ताक्षर किए हैं।"

ज्ञात हो कि अग्रिम सुरक्षा सहयोग पर कार्ययोजना पिछले वर्ष अक्टूबर में हस्ताक्षरित एक घोषणा पर आधारित है। इसमें हाल ही में विदेश और रक्षा मंत्रालय के उपमंत्री/वरिष्ठ अधिकारी स्तर के दोनों पक्षों के दो-दो अधिकारियों की वार्ता का कार्यक्रम भी शामिल है।

कार्ययोजना में कई रणनीतिक और रक्षा उपायों के साथ विदेश मंत्री स्तर की वार्षिक रणनीतिक वार्ता, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच नियमित सलाह मशविरा और रक्षा मंत्रियों की नियमित बैठक भी शामिल है।

हिंद महासागर में समुद्री डकैतियों से निपटना और आतंकवाद के खिलाफ सूचनाओं की साझेदारी कार्य योजना के प्रमुख अवयवों में है।

भारत और जापान के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों को द्विपक्षीय संबंधों का आधार बताते हुए मनमनोहन सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षो के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ संबंधों को बहुआयामी बनाया है।

सुरक्षा वार्ता में वृद्धि की प्रशंसा करते हुए हातोयामा ने आर्थिक संबंधों को बढ़ाने पर जोर दिया और उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारी समझौता करने में कामयाब होंगे।

हातोयामा ने भारत में सुपरफास्ट बुलेट ट्रेन के सपने को साकार होने की आशा भी जगाई।

हातोयामा ने कहा, "जापान में इस ट्रेन के शुरू होने के बाद से अब तक कोई दुर्घटना नहीं हुई है। हम चाहेंगे कि भारत में भी इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल हो।"

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस बारे में प्रस्ताव पर चर्चा जारी है। रेल मंत्रालय देश में बुलेट ट्रेन चलाने की संभावना तलाशने में लगा हुआ है।

द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ाने की वकालत करते हुए हातोयामा ने कहा कि इससे न केवल भारत और जापान को फायदा होगा बल्कि इस क्षेत्र और दुनिया को भी इससे लाभ मिलेगा।

जापानी प्रधानमंत्री ने दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे का जिक्र करते हुए कहा कि इससे जापान के उद्योगपतियों को भारत में अपना निवेश बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

दोनों देशों ने एक साल के भीतर वीजा नियमों को आसान बनाने का फैसला किया ताकि व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। अगले साल तक विस्तृत आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) को आखिरी रूप देने पर दोनों देशों में सहमति बनी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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