आर्थिक सुधारों से गरीबी कम हुई, पर चुनौती बरकरार : प्रधानमंत्री (लीड-2)
भुवनेश्वर में इंडियन इकॉनोमिक एसोसिएशन के 92वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, "मेरे मन में कोई संदेह नहीं है कि गरीबी अभी भी एक बड़ी चुनौती है। हमारे गरीब अभी भी बहुत गरीब हैं और हमें उनकी जीवनशैली में सुधार लाना होगा।"
उन्होंने कहा, "रोजगार के नए अवसरों को सृजित करने के लिए अर्थव्यवस्था को श्रम बल की वृद्धि से भी तेज गति से आगे बढ़ाना होगा।" प्रधानमंत्री ने गरीबी मिटाने के लिए विकास की दर बढ़ाने के सिद्धांत का समर्थन किया और साथ ही 11वीं पंचवर्षीय योजना में लाए गए समेकित विकास के प्रतिपादन पर जोर दिया।
समेकित विकास के लिए प्रधानमंत्री ने शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण क्षेत्रों पर अत्यधिक ध्यान दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, "हमें शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण क्षेत्रों खासकर गरीब, जनजाती, अनुसूचित जाति व जनजाति तथा अल्पसंख्यकों पर अत्यधिक ध्यान देने की जरूरत है।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "कृषि उत्पादों को बढ़ाने के लिए हमें छोटे और हाशिए पर पड़े किसानों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।"
उन्होंने इससे इंकार किया कि सुधारों से गरीबों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। उन्होंने कहा, "ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे पता चले कि नई आर्थिक नीतियों का गरीबों पर प्रतिकूल असर पड़ा है।"
उन्होंने आर्थिक सुधारों के कारण गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में आई कमी का जिक्र करते हुए कहा, "यह सच है कि जिस दर से इसमें कमी आनी चाहिए थी उस दर से कमी नहीं आई।"
उन्होंने कहा, "आदर्श तौर पर देखा जाए तो तथ्य एकदम स्पष्ट हैं। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों का प्रतिशत नहीं बढ़ा है। दरअसल आर्थिक सुधारों के बाद गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों की तादाद में कमी आई है।"
कुछ अर्थशास्त्रियों की दलील है कि गरीबी की खाई पाटी जानी चाहिए। जिसका अर्थ है कि गरीबी का प्रतिशत निश्चित तौर पर ज्यादा है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के प्रतिशत में कमी नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2009-10 के दौरान अर्थव्यवस्था संभवत: सात फीसदी या इससे मामूली ज्यादा की दर से बढ़ेगी।
रविवार को एक संक्षिप्त दौरे पर आए प्रधानमंत्री ने यहां से करीब 25 किलोमीटर दूर कोरधा जिले में प्रस्तावित राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा एवं शोध संस्थान (एनआईएसईआर) की आधारशिला भी रखी।
राज्य सरकार इस संस्थान के लिए पहले ही 300 एकड़ जमीन आवंटित कर चुकी है। ज्ञात हो कि बतौर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का यह दूसरा उड़ीसा दौरा है। पहली बार वह अगस्त 2006 में यहां आए थे। उस दौरान उन्होंने राज्य में एनआईएसईआर की स्थापना की घोषणा की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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