'राठौड़ ने रुचिका को स्कूल से निष्कासित करवाया था'
रुचिका के पिता एस. सी. गिरहोत्रा ने रविवार को संवाददाताओं से कहा, "राठौड़ ने कानून के खिलाफ जाकर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए रुचिका को स्कूल से निष्कासित करवाया था। मेरी बेटी ने उस स्कूल में नर्सरी में नामांकन लिया था और वहां 13 साल तक पढ़ाई की।"
उन्होंने कहा, "स्कूल प्रशासन ने अचानक निष्कासन के बारे में हमें कोई ठोस कारण नहीं बताया। उन्होंने इसके पीछे विलंब शुल्क संबंधी कारण बताए, जो कि पूरी तरह निराधार थे।"
रुचिका सेक्टर 26 में स्थित सेक्रेड हार्ट स्कूल में पढ़ती थी। संयोग से राठौड़ की बेटी भी उसी स्कूल में रुचिका की क्लास में ही पढ़ती थी।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए गिरहोत्रा ने कहा, "मेरी बेटी के आत्महत्या करने के पीछे राठौड़ ही एकमात्र वजह था। यह मेरी समझ से परे है कि सीबीआई ने राठौड़ के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने वाली धाराएं क्यों नहीं लगाईं।"
पिछले 13 साल से रुचिका मामला में नि:शुल्क पैरवी कर रहे वकील पंकज भारद्वाज ने कहा कि सीबीआई की जांच में कई लापरवाही हैं। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित करने की मांग की।
भारद्वाज ने कहा कि राठौड़ ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इस मामले से जुड़े साक्ष्यों और तथ्यों को प्रभावित किया।
भारद्वाज ने कहा कि पुलिस ने अपनी तहकीकात में रुचिका की जगह 'रूबी' नाम लिखा। उसके पिता का नाम एस. सी. गिरहोत्रा से बदलकर एस.सी. खत्री कर दिया गया। इसके अलावा एक और नाम वीणा गिरहोत्रा का जिक्र किया गया है लेकिन मैं आज तक इस महिला से नहीं मिला हूं।
सीबीआई की विशेष अदालत ने राठौड़ को 14 वर्षीय रुचिका से छेड़छाड़ के मामले में दोषी करार दिया था और छह महीने जेल की सजा सुनाई थी।
उभरती टेनिस खिलाड़ी रुचिका के साथ छेड़छाड़ की यह घटना 12 अगस्त 1990 को हुई थी जिसके तीन साल बाद उसने आत्महत्या कर ली थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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