आर्थिक सुधारों से गरीबी कम हुई : प्रधानमंत्री (लीड-1)
उन्होंने इससे इंकार किया कि सुधारों से गरीबों पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
भुवनेश्वर में इंडियन इकॉनोमिक एसोसिएशन के 92वें सम्मेलन को संबोधित करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, "ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे पता चले कि नई आर्थिक नीतियों का गरीबों पर प्रतिकूल असर पड़ा है।"
उन्होंने आर्थिक सुधारों के कारण गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में आई कमी का जिक्र करते हुए कहा, "यह सच है कि जिस दर से इसमें कमी आनी चाहिए थी उस दर से कमी नहीं आई।"
उन्होंने कहा, "आदर्श तौर पर देखा जाए तो तथ्य एकदम स्पष्ट हैं। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों का प्रतिशत नहीं बढ़ा है। दरअसल आर्थिक सुधारों के बाद गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों की तादाद में कमी आई है।"
कुछ अर्थशास्त्रियों की दलील है कि गरीबी की खाई पाटी जानी चाहिए। जिसका अर्थ है कि गरीबी का प्रतिशत निश्चित तौर पर ज्यादा है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के प्रतिशत में कमी नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2009-10 के दौरान अर्थव्यवस्था संभवत: सात फीसदी या इससे मामूली ज्यादा की दर से बढ़ेगी।
रविवार को एक संक्षिप्त दौरे पर आए प्रधानमंत्री ने यहां से करीब 25 किलोमीटर दूर कोरधा जिले में प्रस्तावित राष्ट्रीय विज्ञान शिक्षा एवं शोध संस्थान की आधारशिला भी रखी।
राज्य सरकार इस संस्थान के लिए पहले ही 300 एकड़ जमीन आवंटित कर चुकी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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