शिबू सोरेने ने सरकार बनाने का दावा पेश किया

सलमान रावी
बीबीसी संवाददाता, राँची
झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन ने 81 में से 42 विधायकों की सूची राज्यपाल के शंकरनारायण को सौंपकर राज्य में सरकार बनाने का दावा प्रस्तुत किया है.
शिबू सोरेन शनिवार दोपहर भाजपा नेता यशवंत सिन्हा और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मंडा के साथ राज्यपाल से मिले. उन्होंने जेएमएम के 18, भाजपा के 18 और ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन पाँच विधायकों का समर्थन होने का दावा किया है. माना जा रहा है कि जनता दल (यूनाइटेड) के दो विधायकों का समर्थन भी शिबू सोरेन को मिल सकता है.
उधर झारखंड भाजपा के अध्यक्ष रघुबर दास और ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन के सुदेश महतो ने भी अपने अपने विधायकों और उनके शिबू सोरेन को समर्थन देने के पत्र राज्यपाल को सौंपे हैं.
किसी को बहुमत नहीं ग़ौरतलब है कि हाल में झारखंड विधानसभा के लिए हुए चुनावों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. जहाँ कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को 25 और भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को 20 सीटें मिली थीं, वहीं जेएमएम 18 सीटें जीतकर एक मुख्य खिलाड़ी के रूप में सामने आया था. झारखंड मुक्ति मोर्चा के शिबू सोरने ने शर्त रखी थी कि उनकी पार्टी उन्हीं दलों का सहयोग करेगी जो उनका मुख्यमंत्री पद के दावे का समर्थन करेंगे.
ग़ौरतलब है कि हाल में झारखंड विधानसभा के लिए हुए चुनावों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. जहाँ कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को 25 और भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को 20 सीटें मिली थीं, वहीं जेएमएम 18 सीटें जीतकर एक मुख्य खिलाड़ी के रूप में सामने आया था.
झारखंड मुक्ति मोर्चा के शिबू सोरने ने शर्त रखी थी कि उनकी पार्टी उन्हीं दलों का सहयोग करेगी जो उनका मुख्यमंत्री पद के दावे का समर्थन करेंगे.
उधर विधानसभा चुनाव के बाद लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल को पाँच, मार्क्सवादी समन्वय समिति और आदिवासी छात्र संघ को एक-एक और अन्य सीटें निर्दलीयों-अन्य दलों को मिली थीं.
जहाँ जेएमएम के शिबू सोरेन नें मुख्यमंत्री पद की शर्त रखी थी वहीं कांग्रेस के सहयोगी दल झारखंड विकास मोर्चा (जिसके 11 विधायक हैं) के नेता बाबूलाल मरांडी ने सोरेन पर दबाब बनाने की कोशिश की थी.
बाबूलाल मरांडी नें बयान दिया था कि कांग्रेस और झारखण्ड विकास मोर्चा बिना झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के भी सरकार बनाने की स्थिति में हैं.
बाबूलाल का इशारा छोटे-छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की तरफ़ है जिनकी कुल संख्या 18 है.












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