नए विवाद में फँसे एनडी तिवारी

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी एक नए नए विवाद में फँस गए हैं जिसकी वजह से राज्य के विपक्षी दलों ने मांग की है कि या तो वे पद से हट जाएँ या फिर उन्हें बर्खास्त कर दिया जाए.
यह विवाद एक टेलीविज़न चैनल के एक वीडियो से शुरु हुआ है, जिसके प्रसारण पर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रतिबंध लगा दिया है.
दूसरी ओर राजभवन से जारी एक वक्तव्य में कहा गया है कि टेलीविज़न चैनल जिस वीडियो की बात कर रहा है 'वह मनगढ़ंत, झूठा और दुर्भावनापूर्ण' है.
राजभवन के वकील ने कहा है कि इस वीडियो को प्रसारित करने वाले टेलीविज़न चैनल और इस पर चर्चा करने वाले दूसरे चैनलों पर मानहानि का मुक़दमा दर्ज किया जाएगा.
आंध्र ज्योति नाम से अख़बार निकालने वाले समूह के नए टीवी चैनल एबीएन ने शुक्रवार की सुबह एक वीडियो का प्रसारण किया था जिसमें एक वृद्ध व्यक्ति को तीन निर्वस्त्र महिलाओं के साथ दिखाया गया था.
चैनल का दावा है कि यह वीडियो राज्यपाल नारायण दत्त तिवारी का है. हालांकि वीडियो से यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं होता कि वह वृद्ध व्यक्ति कौन है.
इससे पहले नारायण दत्त तिवारी को लेकर एक विवाद दिल्ली में हुआ था जब एक युवक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके दावा किया था कि वह नारायण दत्त तिवारी का बेटा है. हाईकोर्ट ने यह याचिका ख़ारिज कर दी थी.
विवाद
आंध्र ज्योति ने शुक्रवार के अंक में बड़े विज्ञापन प्रकाशित किए थे और लोगों से कहा गया था कि वे राजभवन से जुड़ी सनसनीख़ेज़ ख़बर देखें.
इस विज्ञापन के आधार पर राजभवन ने हैदराबाद हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई थी कि इसका प्रसारण रोक दिया जाए. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस वीडियो के प्रसारण पर रोक लगाने के आदेश दिए थे और कहा था कि एबीएन और कोई दूसरा चैनल भी इसे प्रसारित न करे.
जब तक ये आदेश टेलीविज़न चैनल तक पहुँचाए जाते तब तक चैनल ने वीडियो का प्रसारण कर दिया था. हालांकि आदेश के बाद चैनल ने वीडियो को दोबारा प्रसारित नहीं किया लेकिन इस वीडियो के आधार पर चर्चाओं और बहसों का सिलसिला जारी रखा.
इसके प्रसारण का व्यापक असर हुआ और कुछ ही देर में राजभवन के सामने और शहर में कई जगह महिला संगठनों और दूसरे संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन शुरु हो गए और राज्यपाल के इस्तीफ़े की मांग शुरु हो गई.
प्रमुख विपक्षी दल चंद्रबाबू नायडु ने इसके बाद जारी एक वक्तव्य में कहा है, "या तो राज्यपाल ख़ुद यह पद छोड़ दें या फिर केंद्र सरकार उन्हें तत्काल बर्खास्त करे."
उनका कहना है कि इस घटना ने एक संवैधानिक पद की प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुँचाया है.
कुछ और राजनीतिक दलों ने भी राज्यपाल के इस्तीफ़े की मांग की है.
नारायण दत्त तिवारी ने हमेशा से कांग्रेस पार्टी की राजनीति की है. कांग्रेस की ओर से इस विवाद पर कहा गया है कि इस मामले की जाँच होनी चाहिए.
ख़बरें हैं कि यह वीडियो राधिका नाम की एक महिला ने तैयार करवाई है, जो उत्तराखंड की रहने वाली हैं. उत्तराखंड वही राज्य है, जिसके गठन के बाद नारायण दत्त तिवारी को वहाँ का पहला मुख्यमंत्री बनाया गया था.
राधिका ने मीडिया से कहा है कि राज्यपाल ने इन लड़कियों को नौकरी देने का आश्वासन दिया था इसलिए उन्होंने इन लड़कियों को वहाँ भेजा था.
एक विरोधाभासी बयान में राधिका ने यह भी कहा है कि राज्यपाल तिवारी ने उन्हें कड़प्पा में एक खदान की लीज़ देने का आश्वासन दिया था, जिसे उन्होंने पूरा नहीं किया इसलिए उन्होंने यह वीडियो फ़िल्म बनाई है और इसे सार्वजनिक करने का फ़ैसला किया है.
खंडन
दूसरी और राजभवन से इस प्रकरण को झूठा और दुर्भावनापूर्ण बताया है.
राजभवन से जारी वक्तव्य में कहा गया है, "नारायण दत्त तिवारी 86 वर्ष के हो चुके हैं और वे अपनी ज़िंदगी के ढलान पर हैं."
वक्तव्य में कहा गया है कि राजभवन हमेशा लोगों के लिए खुला होता है और वह किसी भी तरह के शक-शुबह से ऊपर होता है.
इसके अनुसार, "राज्यपाल बिना भय या पक्षपात के अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारियाँ निभाते रहेंगे."
इस बयान में कहा गया है कि संवैधानिक पद पर काम करने वाले लोगों को इस तरह के विवादों में घसीटा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है.












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