रुचिका प्रकरण : गृह मंत्रालय का राठौर को नोटिस, पुन: जांच के संकेत (लीड-2)
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने इस मामले की फिर से जांच कराने के संकेत दिए हैं वहीं केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि अपनी शक्तियों के गलत इस्तेमाल के लिए आखिर क्यों न उनसे राष्ट्रपति पदक छीन लिया जाए और उनके पेंशन की राशि कम कर दी जाए।
इस मामले की फिर से जांच कराने की मांग जोर पकड़ने लगी है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता वृंदा करात ने हुड्डा से नई दिल्ली में मुलाकात कर राठौर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की।
बाद में पत्रकारों से चर्चा के दौरान हुड्डा ने मामले की फिर से जांच कराने के संकेत दिए। उन्होंने कहा, "जहां तक मेरा मानना है, हम इस मामले पर फिर से गौर करेंगे। पीड़िता के परिवार के प्रति मेरी पूरी सहानुभूति है।"
हुड्डा ने कहा, "मैं पहले ही राज्य के पुलिस महानिदेशक से रुचिका के परिवार को पूरी सुरक्षा देने के लिए कह चुका हूं।"
इधर, गृह मंत्रालय ने भी राठौर के खिलाफ सख्त रूख अख्तियार कर लिया है। मंत्रालय ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर क्यों न उससे राष्ट्रपति पदक छीन लिया जाए और पेंशन की राशि कम कर दी जाए।
गृह सचिव जी. के. पिल्लई ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मंत्रालय पूर्व पुलिस महानिदेशक से वर्ष 1985 में दिए गए पुलिस मेडल वापस लेने के लिए कदम बढ़ा रहा है। इस मसले को संबद्ध समिति को भेजा जाएगा और बाद में इसे राष्ट्रपति को भेज दिया जाएगा।"
उन्होंने कहा कि राठौर को दी जाने वाली पेंशन की भी जांच की जा रही है।
इस बीच, चण्डीगढ़ में पीड़ित पक्ष के वकील पंकज भारद्वाज ने शनिवार को रुचिका की चिकित्सकीय रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसमें कई विसंगतियां थीं। पिछले 13 वर्षो से इस मामले की निशुल्क पैरवी करने वाले भारद्वाज ने आईएएनएस से कहा, "हमें चिकित्सकीय रिपोर्ट में कई गंभीर विसंगतियां मिली, जिन्होंने मामले की सुनवाई में अहम भूमिका निभाई। रुचिका की आत्महत्या के बाद पुलिस को जो रिपोर्ट सौंपी गई उसमें कहा गया था कि उसने मोटापा कम करने की दवा का निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन कर लिया था।"
रुचिका की चिकित्सकीय रिपोर्ट पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) ने तैयार की थी।
भारद्वाज ने कहा, "ऐसा कम ही होता है कि किसी की मौत मोटापा कम करने वाली दवा के अत्यधिक सेवन करने से हो जाए। विभिन्न चिकित्सकीय औपचारिकताओं और कानूनी जटिलताओं से बचने और मामले को रफादफा करने के लिए यह कारण दिया गया था।"
रुचिका की दोस्त आराधना के पिता आनंद प्रकाश ने शनिवार को आईएएनएस से कहा, "हालांकि ऐसे अपराध में छह महीने की सजा कुछ भी नहीं है लेकिन फिर भी हम संतुष्ट हैं कि अदालत ने राठौर को दोषी माना। अब हम चाहते हैं कि संबद्ध विभाग राठौर से उसको अबतक मिले सभी सम्मान छीन लें।"
रुचिका और उसके परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रकाश और उनकी पत्नी मधु गत 19 वर्षो से लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रकाश ने कहा, "राठौर राज्य सरकार के संरक्षण के कारण 19 साल तक बचता रहा। इस वजह से रुचिका के परिजनों को न्याय मिलने में देरी हुई, इसके लिए हमारी सरकार भी जिम्मेदार है।"
प्रकाश ने कहा, "राज्य सरकार द्वारा रुचिका के परिजनों को वित्तीय मुआवजा दिलाने के लिए हम अदालत में याचिका दायर करेंगे। हमारे वकील सभी तथ्यों का मूल्यांकन कर रहे हैं और हम जल्द ही याचिका दायर करेंगे।"
रुचिका के भाई आशु को भी पुलिस प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा था। प्रकाश ने कहा, "हम पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में रुचिका मामले को फिर से खोलने और राठौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाने के लिए याचिका दायर करेंगे।"
प्रकाश ने कहा, "मैं पहले अकेले था इसलिए राठौर अपनी इच्छा से हेरफेर करता था लेकिन आज मुझे पूरे समाज का समर्थन प्राप्त है। हमें भरोसा है कि अदालत उसके अपराध के अनुरूप उसे सजा जरूर देगी।"
गौरतलब है कि 12 अगस्त 1990 को राठौर ने 14 वर्षीया रुचिका के साथ दुर्व्यवहार किया था और इसके तीन साल बाद रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले की एकमात्र गवाह आराधना ही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने सोमवार को इस मामले में राठौर को छह महीने की सजा सुनाई थी और 10 मिनट के भीतर ही उसे जमानत पर रिहा भी कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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