गृह मंत्रालय ने राठौर को नोटिस भेजा
गृह सचिव जी.के.पिल्लई ने कहा, "मंत्रालय पूर्व पुलिस महानिदेशक से वर्ष 1985 में दिए गए पुलिस मेडल वापस लेने के लिए कदम बढ़ा रहा है। इस मसले को संबद्ध समिति को भेजा जाएगा और बाद इसे राष्ट्रपति को भेज दिया जाएगा।"
पिल्लई ने कहा राठौर को दी जाने वाली पेंशन की जांच की जा रही है।
उधर, हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा है कि बहुचर्चित रुचिका गिरहोत्रा मामले की फिर से जांच की जाएगी। हुड्डा ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, "मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि हम इस मामले की फिर जांच करेंगे। पीड़िता परिवार के प्रति मेरी पूरी सहानुभूति है।"
उन्होंने कहा, "मैं पहले ही राज्य के पुलिस महानिदेशक से रुचिका के परिवार को पूरी सुरक्षा देने के लिए कह चुका हूं।"
इससे पहले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता वृंदा करात ने हुड्डा से मिलकर इस मामले के दोषी एस.पी.सी. राठौर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की।
इस मुलाकात के बाद वृंदा ने संवाददाताओं से कहा, "हम चाहते हैं कि राठौर की सजा को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार सक्रिय हो और इस मामले की जांच दोबारा की जाए।"
हुड्डा से मुलाकात के दौरान रुचिका की मित्र और इस मामले की एकमात्र गवाह अराधना के माता-पिता भी वृंदा के साथ थे। माकपा नेता ने कहा, "मुख्यमंत्री ने हमारी बातों को सहानुभूति के साथ सुना। उन्होंने कहा कि उनकी समझ से इस मामले की फिर से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानूनी सलाह लेने के बाद वह उचित कदम उठाएंगे।"
उन्होंने कहा, "हमने यह भी मांग की है कि मुख्यमंत्री के अधीन एक समित का गठन किया जाए जो राठौर को मिले राजनीतिक संरक्षण और पदोन्नतियों की जांच करे।"
वृंदा ने कहा, "इस मामले के दो पहलू हैं। पहला न्यायिक है तो दूसरा राजनीतिक। राठौर की जमानत रद्द करके उसे जेल भेजा जाना चाहिए और उसे राजनीतिक शरण देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।"
गौरतलब है कि 12 अगस्त, 1990 को हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक राठौर ने 14 वर्षीय रुचिका के साथ दुर्व्यवहार किया था और इसके तीन साल बाद रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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