राजगोपाल को अस्पताल से छुट्टी मिली

राजगोपाल को अस्पताल से छुट्टी मिली

अलग तेलंगाना राज्य के विरोध में आमरण अनशन पर बैठे विजयवाड़ा के कांग्रेसी सांसद एल राजगोपाल ने औपचारिक रूप से आमरण अनशन तोड़ दिया है.

मंगलवार को उन्हें हैदराबाद के निज़ाम इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. वे 14 दिसंबर से अलग तेलंगाना राज्य का विरोध करते हुए आमरण अनशन पर थे.

हालांकि राजगोपाल का कहना था कि 19 दिसंबर को कोर्ट के आदेश के बाद अस्पताल में उन्हें ग्लूकोज चढ़ाया गया था और इस तरह से तकनीक तौर पर उनका आमरण अनशन उसी दिन ख़त्म हो गया था.

इससे पहले रविवार को राजगोपाल विजयवाड़ा के एक सरकारी अस्पताल से इलाज के दौरान लापता हो गए थे और फिर नाटकीय अंदाज़ में सोमवार को हैदराबाद में मिल गए थे. फिर उन्हें हैदराबाद के निज़ाम इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस अस्पताल में भर्ती कराया गया.

एल राजगोपाल ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "पुलिस के रोकने के बावजूद हैदराबाद आकर मैं यह सिद्ध करना चाहता था कि हैदराबाद नगर आंध्र प्रदेश का भाग है ना कि पाकिस्तान या अफ़ग़ानिस्तान का."

प्राथमिक अधिकारों का उल्लंघन

उन्होंने कहा कि हैदराबाद में न रहने देने और विजवाड़ा से हैदराबाद आने न देने की जो नीति सरकार ने अपनाई थी वह उनके प्राथमिक अधिकारों का उल्लंघन था.

उधर सरकार का कहना था कि एल राजगोपाल के हैदराबाद आने से वहाँ पर तनाव बढ़ने की संभावना थी और इससे टकराव उत्पन्न हो सकता था.

राज्य सरकार ने राजगोपाल के लापता होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए विजयवाड़ा के पुलिस आयुक्त राजेंद्र नाथ रेड्डी समेत छह पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. दूसरी ओर सांसद के ख़िलाफ़ भी मुक़दमा दर्ज किया गया है.

ग़ौरतलब है कि तेलंगाना के विरोध में आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में विरोध प्रदर्शनों का 14वाँ दिन है. जिससे उन इलाकों में आम जनजीवन अस्तव्यस्त है.

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