'श्रीलंका के शिविरों में भोजन के एवज में यौन शोषण'
मेनिक फार्म शरणार्थी शिविर में कटीले तारों के घेरे में खुद भी चार महीनों तक बंद रहीं वानी कुमार ने समाचार पत्र आब्जर्वर को बताया है कि सुरक्षा कर्मियों ने यौन शोषण के बदले खाने को भोजन दिया।
वानी कुमार ने कहा है, "यौन शोषण जैसे वहां आम बात थी, जिसे मैंने अपनी आंखों से देखा। मुलाकातियों के क्षेत्र में रिश्तेदारों को कटीले तारों के घेरे के दूसरी ओर रखा जाता था और हम शिविर में होते थे। लड़कियां अपने रिश्तेदारों के इंतजार में आती थीं और सैन्य अधिकारी वहां उनके शरीर को स्पर्श करते थे।"
उन्होंने कहा है, "लड़कियां आमतौर पर जुबान नहीं खोलती थीं, क्योंकि वे जानती थीं कि शिविर में यदि उन्होंने जुबान खोली तो उनके साथ कुछ भी घट सकता है। यह सब खुलेआम होता था। हर कोई देख सकता था कि सैन्य अधिकारी लड़कियों की देह का स्पर्श कर रहे हैं।"
कुमार ने कहा है, "तमिल लड़कियां आमतौर पर यौन शोषण के बारे में बात नहीं करतीं, वे इस बारे में अपनी जुबान नहीं खोलतीं, लेकिन मैंने सुना है कि अधिकारी यौन शोषण के बदले महिलाओं को पैसा और भोजन दे रहे थे।"
एसेक्स से जैव चिकित्सा में स्नातक कुमार ने यह भी दावा किया है कि कैदियों को कड़ी धूप में घंटों तक घुटने टेक कर खड़े रहने की सजा भी दी जाती थी। जिन पर तमिल लड़ाकों के साथ संबंध होने का शक होता था उन्हें कहीं दूर ले जाया जाता था और वे अपने परिवार से फिर कभी नहीं मिल पाते थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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