जंगल बचाने के लिए 3.5 अरब डॉलर

copenhegan
कोपेनहेगेन में जलवायु समझौते की खत्म होती उम्मीदों के बीच कुछ विकसित देशों ने जंगलों को बचाने के लिए 3.5 अरब डॉलर देने का एलान किया है.

ब्रिटेन, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, नार्वे और फ़्रांस ने अगले तीन सालों में ये रकम नगद देने का वादा किया है.माना जा रहा है कि दुनिया में हो रहे कार्बन उत्सर्जन का बीस प्रतिशत कटते हुए जंगलों की वजह से है.

उम्मीद की जा रही है कि ये पैसा विकासशील देशों में जंगलों की कटाई को कम करने, रोकने और अंतत: नए पेड़ लगाने की प्रक्रिया को शुरू करने में सहायक होगा.लेकिन ये मामला इस जलवायु सम्मेलन के कम पेचीदे मामलों में से है और इसके साथ भी कई शर्तें जुड़ी हुई हैं.

ये पैसा दस अरब डॉलर के एक पैकेज का हिस्सा होगा जिसका जारी होना इस पर निर्भर करेगा कि कोई ठोस समझौता होता है या नहीं.इसके अलावा बीबीसी संवाददाता मैट मैक्ग्रॉ का कहना है कि जंगलों की कटौती रोकने के लिए ये रकम ऊंट के मुंह में ज़ीरा की तरह है.

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट का कहना है कि अब से लेकर 2015 तक जंगलों की कटौती में 25 प्रतिशत की कमी लाने के लिए पच्चीस अरब डॉलर की ज़रूरत पड़ेगी.वहीं जापान ने इसके अलावा ग़रीब देशों को अगले तीन सालों में पांच अरब डॉलर देने का वादा किया है बशर्ते चीन जैसे विकासशील देश एक बाध्यकारी समझौते के लिए तैयार हो जाएं.

इस तरह की घोषणाओं का कुछ देशों ने तो स्वागत किया है लेकिन वार्ताकार इसे विकासशील देशों के लिए एक मीठी गोली की तरह देख रहे हैं जिसके लालच में वो कोपेनहेगेन में किसी समझौते पर दस्तखत करने के लिए तैयार हो जाएं. भारत समेत कई देशों के वार्ताकार अब किसी बाध्यकारी समझौते की उम्मीद छोड़ते नज़र आ रहे हैं और इसी माहौल में आज दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्ष कोपेनहेगेन पहुंच रहे हैं.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+