भोपाल गैस पीड़ितों का अमेरिका के खिलाफ खुला पत्र
भोपाल गैस पीड़ित सहयोग संघर्ष समिति के आह्वान पर 25 साल पहले हुई त्रासदी का दंश झेल रहे बच्चों और महिलाओं ने हादसे के लिए जिम्मेदार यूनियन कार्बाइड संयंत्र के सामने पहुंचकर जमकर नारेबाजी की।
इस मौके पर पीड़ित बच्चों और महिलाओं ने कोपेनहेगन सम्मेलन में पहुंचे राष्ट्राध्यक्षों को खुला पत्र भेजा। इस पत्र में अमेरिका की नीतियों की आलोचना की गई है। इसमें कहा गया है कि जिस देश ने दुनिया का पर्यावरण बिगाड़ा है वही जलवायु परिवर्तन पर चिंता जता रहा है।
खुले खत में भोपाल गैस त्रासदी और उसके बाद मिल रही बीमारियों का ब्योरा दिया गया है। इसमें कहा गया है कि अमेरिका की मुनाफाखोर नीति ने दुनिया के पर्यावरण को बिगाड़ने का काम किया है जिसका उदाहरण भोपाल शहर है। जहां हादसे की रात 2-3 दिसंबर 1984 को हजारों लोग मर गए और वह सिलसिला अब भी जारी है। बीमारियां लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है और अमेरिकी कंपनी से इन पीड़ितों को कुछ भी हासिल नहीं हुआ है।
इस मौके पर भोपाल गैस पीड़ित सहयोग संघर्ष समिति की साधना कर्णिक प्रधान, भूषण भट्टाचार्य, शाहजादी बी, रईस खान आदि ने कोपेनहेगन पहुंचे तमाम राष्ट्राध्यक्षों से अपील की है कि वे अमेरिका की नीतियों का जमकर विरोध करें।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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