संसद में छाया रहा तेलंगाना, हेडली व महिला आरक्षण (राउंडअप)

इधर, राज्यसभा में कुछ अच्छी खबरें भी आईं। कांग्रेस की जयंती नजराजन ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण मुहैया कराने के लिए विधेयक पर बजट सत्र में ही चर्चा होगी।

लोकसभा में गुरुवार को अलग तेलंगाना के समर्थन और विरोध में जमकर हुए हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा को दिन भर स्थगित करने से पहले केवल 15 मिनट के भीतर सदन में 28 दस्तावेज रखे गए।

भोजन अवकाश से पहले और बाद के सत्र में लगातार हंगामे के कारण लोकसभा उपाध्यक्ष करिया मुंडा ने सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।

भोजनकाल से पूर्व सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित हुई। पहले कार्यवाही 15 मिनट के लिए 11.15 बजे स्थगित की गई। सदन की कार्यवाही 11.30 बजे दोबारा शुरू हुई। प्रश्नकाल की कार्यवाही सुचारू रूप से चली और उसके बाद फिर से शोरगुल शुरू हो गया। इस पर अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी।

दो बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव ने नए राज्यों की मांग को एक खतरनाक परिपाटी बताया। उन्होंने कहा कि इससे देश में कई अन्य राज्यों के भी विभाजन की मांग उठने की आशंका है।

आंध्र प्रदेश के सांसदों का हंगामा फिर शुरू होने के बाद लोकसभा उपाध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।

इससे पहले सुबह कुछ सांसदों ने हाथों में तख्तियां थाम रखी थीं। इन तख्तियों पर 'हम एकीकृत आंध्र प्रदेश चाहते हैं' लिखा था। कुछ कांग्रेसी सांसदों ने भी तख्तियां उठा रखी थीं जिन पर तेलुगू में यही लिखा था। लेकिन वे अपनी सीट से नहीं उठे।

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी के पुत्र वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी ने भी चुपचाप अपनी सीट के समीप खड़े रहकर उनका साथ दिया।

एकीकृत आंध्र प्रदेश के पक्षधरों का विरोध तेलंगाना क्षेत्र के सांसदों ने किया। इनमें कांग्रेस और तेलुगू देशम पार्टी के सदस्य शामिल थे जिन्होंने 'जय तेलंगाना' की तख्तियां थाम रखी थीं।

अध्यक्ष मीरा कुमार ने शोरगुल के बीच कहा, "तख्तियां मत दिखाइये। कृपया सदन में ये सब शुरू मत कीजिए।"

उन्होंने बार-बार कहा, "इस सदन की कुछ मर्यादा है। यह मर्यादा का उल्लंघन है। कृपया मर्यादा बनाए रखिए।"

पंद्रह मिनट की अवधि में शोरगुल के दौरान 28 दस्तावेज पटल पर रखे गए।

उधर, राज्यसभा में हेडली के मामले में भाजपा और वामदलों के सदस्यों ने प्रधानमंत्री से अमेरिका की ओर से दिए जा रहे सहयोग पर स्पष्टीकरण मांगा।

भाजपा और वामदलों के सदस्यों ने मुंबई के 26/11 के आतंकी हमलों में हेडली के कथित संलिप्तता की जानकारी देने के संबंध में अमेरिका की ओर से दिए जा रहे सहयोग मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से स्पष्टीकरण मांगा।

सभापति हामिद अंसारी ने कहा, "मुझे पक्का यकीन है कि सरकार सही वक्त आने पर जवाब देगी।" इस पर सदन में मौजूद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सिर हिलाकर हामी भरी।

सदन में इस मसले को दूसरी बार उठाते हुए मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की सदस्य वृंदा करात ने कहा, "यह मसला भारत के सभी नागरिकों से जुड़ा है। मैं प्रधानमंत्री से अनुरोध करती हूं कि वह इस बारे स्पष्टीकरण दें कि इस मसले को अमेरिका के समक्ष उठाने के लिए हम क्या कदम उठाने जा रहे हैं।"

करात ने हेडली के वीजा संबंधी दस्तावेज के गायब होने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विदेश सचिव ने बुधवार को जहां शिकागो स्थित वाणिज्य दूतावास को क्लीन चिट दिखा दी वहीं गृह मंत्रालय ने दस्तावेज नहीं मिलने पर चिंता जाहिर की है।

करात ने कहा, "क्या विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय में कोई मतभेद हैं? " उन्होंने इससे पहले यह मसला मंगलवार को भी उठाया था।

गुरुवार को सदन की बैठक शुरू होते ही विपक्ष के नेता भाजपा के अरुण जेटली ने यह मसला उठाया। उन्होंने हेडली प्रकरण पर सरकार से जवाब मांगा।

जेटली ने कहा कि वीजा दस्तावेज के गायब होने का मामला गंभीर है। उन्होंने कहा कि हेडली के बारे में अमेरिका के पास जो जानकारियां हैं, क्या वह हमसे साझा की गई है। उन्होंने भी करात की तरह पूछा कि क्या विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय में कोई मतभेद हैं?

सपा के अमर सिंह ने हेडली के प्रत्यर्पण की मांग की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी एजेंसी को मुंबई हमले में एकमात्र जीवित पकड़े गए आतंकवादी से पूछताछ की अनुमति दी गई थी, अब उसे हेडली को हमें सौंप देना चाहिए।

इस सबके बीच लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण विधेयक पर स्थायी समिति की रिपोर्ट गुरुवार को सपा, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जनता दल (युनाइटेड) के भारी विरोध के बीच संसद के दोनों सदनों में पेश कर दी गई।

भाजपा के शाहनवाज हुसैन ने यह रिपोर्ट लोकसभा में पेश की तो सपा, राजद और जद (यू) के सदस्य इसके विरोध में खड़े हो गए। ये तीनों दल महिला आरक्षण विधेयक के मौजूदा प्रारूप का विरोध कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही माहौल राज्यसभा में देखने को मिला जब कांग्रेस की नेता जयंती नटराजन ने यह रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी।

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है, "महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण वैधानिक है और नीति निर्धारण प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने से जुड़ी आवश्यक रणनीति के लिए भी यह आवश्यक है।"

राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया, "निजी एवं जन शिकायत और कानून एवं न्याय विभाग से संबंधित जयंती नटराजन की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति ने 17 दिसंबर, 2009 को महिला आरक्षण विधेयक पर 36वीं रिपोर्ट राज्यसभा में पेश कर दी है।"

विज्ञप्ति में कहा गया, "यह रिपोर्ट इसी दिन लोकसभा में भी पेश कर दी गई है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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