अदालत के फैसले ने जरदारी की माफी छीनी
अदालत ने बुधवार को अपने फैसले में कहा था कि भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ जरदारी और उनके सहयोगियों की सुरक्षा का आदेश अवैध और संविधान के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हामिद खान कहते हैं कि यह फैसला न्यायपालिका को स्वतंत्र बनाने के लिए वकीलों द्वारा चलाए गए आंदोलन का परिणाम है।
समाचार पत्र 'डॉन' के गुरुवार को प्रकाशित अंक के मुताबिक उन्होंने कहा कि अदालत में अपने खिलाफ लंबित पड़े मामलों का सामना करने के लिए जरदारी को स्वेच्छा से अपने पद से हट जाना चाहिए।
लाहौर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (एलएचसीबीए) के सचिव मुक्तादिर अख्तर शब्बिर ने कहा कि अदालत ने सिद्ध कर दिया है कि देश में कानून के सामने सभी समान हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जांच के तहत आने वाले सभी मामले या लंबित पूछताछ और बाद में वापस ले लिए गए मामले या एनआरओ के चलते जो जांचें या पूछताछ समाप्त कर दी गई थीं, उन सभी को दोबारा शुरू किया जाएगा और सम्बद्ध अधिकारी कानून के अनुसार मामले आगे बढ़ाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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