दुल्हनों को गांव में प्रवेश से पहले लेना पड़ता है शाकाहार का संकल्प

बांका जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर आराहाट तथा धोरैया प्रखंड की सीमा पर कुमारडीह गांव स्थित है। यहां की आबादी करीब 350 है। यहां अधिकांश लोग यादव जाति के हैं। इस गांव में वधू को प्रवेश से पूर्व आजीवन शाकाहारी होने का संकल्प लेना पड़ता है। यहां मान्यता है कि यदि कोई दुल्हन भूलवश मांस का सेवन कर लेती है तो उसे गंगा स्नान करके ही इस पाप से मुक्ति मिल सकती है।

गांव के बुजुर्ग राजेन्द्र यादव की मानें तो गांव में इस परंपरा का चलन काफी पुराना है। उन्होंने बताया कि लगभग दो-ढाई सौ वर्ष पूर्व पूरे गांव में 10 वर्ष तक किसी भी दंपत्ति को संतान की प्राप्ति नहीं हुई थी। तभी कोई बाबा आए जिन्होंने यहां के लोगों को मांसाहार नहीं करने की सलाह दी। तभी से इस गांव में मांसाहार पूरी तरह से बंद है और नई दुल्हनों को भी यहां प्रवेश के पूर्व ही शाकाहरी रहने का संकल्प लेना पड़ता है।

इधर, ग्रामीण अरविंद यादव बताते हैं कि यही नहीं अगर इस गांव के लोग अपनी लड़की का विवाह भी तय करते हैं तो उस संबंधी से पहले ही निवेदन किया जाता है कि उनकी बेटी को मांस और मछली खाने के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा। वह बताते हैं कि यहां के लोगों की कोशिश तो यही होती है कि किसी ऐसे परिवार में रिश्ता ही नहीं किया जाए जहां मांस का सेवन होता है। वह बताते हैं कि यहां के लोग अपने बेटे या बेटी की शादी तय होने के पूर्व ही इस बात को बता देते हैं।

शाकाहार के प्रति निष्ठा का आलम यह है कि यहां के लोग गांव के बाहर भी जाते हैं तो अपने साथ खाने-पीने का सामान साथ ले जाते हैं। यहां के समारोहों में मांस का कोई स्थान नहीं होता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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