माइक्रोसॉफ्ट ने पाइरेसी के खिलाफ कमर कसी
जेम्स जोस
नई दिल्ली, 16 दिसम्बर (आईएएनएस)। उपभोक्ताओं से विंडोज 7 और अन्य लोकप्रिय सॉफ्टवेयरों की बढ़ती पाइरेसी की शिकायतों से माइक्रोसॉफ्ट ने इस अपराध को रोकने की पहल की है।
माइक्रोसॉफ्ट के 'जेनुइन सॉफ्टवेयर इनिशिएटिव' के निदेशक विपुल पंत ने कहा, "पाइरेसी के शिकार उपभोक्ता की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। इसे रोकने के लिए हम कुछ उपाय करेंगे।"
पंत ने आईएएनएस को बताया, "जनवरी से अब हमें भारत से 2,000 और पूरी दुनिया में 150,000 उपभोक्ताओं की शिकायतें मिल चुकी हैं।"
अमेरिका स्थित 80 से अधिक देशों की सॉफ्टवेयर कंपनियों की गैर व्यावसायिक व्यापार संस्था बिजनेस सॉफ्टवेयर एलायंस और बाजार निरीक्षक आईडीसी के एक अध्ययन के अनुसार वर्ष 2008 में भारत में पाइरेसी का स्तर 68 प्रतिशत था और इससे 2.7 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
पर्सनल कंप्यूटर (पीसी) सॉफ्टवेयर में पाइरेसी में 10 प्रतिशत की कटौती से भारत में 44,000 नौकरियां पैदा हो सकती हैं। इससे 20 करोड़ डॉलर का कर राजस्व और 3.1 अरब डॉलर की आर्थिक वृद्धि हासिल होगी।
पंत ने कहा कि भारत में तीन करोड़ पीसी हैं। इनमें से एक करोड़ से अधिक इंटरनेट से जुड़े हैं। माइक्रोसॉफ्ट 70 देशों में पाइरेटेड सॉफ्टवेयरों खतरे के बारे में बताने के लिए एक अभियान शुरू करेगा। कंपनी पाइरेसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू करेगी।
बहरहाल व्यापार पत्रिका साइबरमीडिया के मुख्य संपादक प्रशांतो रॉय ने कहा कि अतीत में पाइरेसी से मुकाबला करने में माइक्रोसॉफ्ट को अधिक सफल नहीं मिली।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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