शोपियां कांड की सीबीआई जांच रिपोर्ट के खिलाफ हड़ताल
रिपोर्ट के विरोध में आयोजित हड़ताल के कारण घाटी में जनजीवन ठप्प हो गया। हड़ताल का आह्वान शोपियां मजलिस मुशावरात ने किया था। हुर्रियत कांफ्रेंस के दोनों धड़ों ने हड़ताल का समर्थन किया।
राज्य के उच्च न्यायालय की खंडपीठ के सामने सोमवार को पेश अपनी 66 पेज की रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा कि नीलोफर जान (22 वर्ष) और उसकी ननद आसिया जान (17 वर्ष) की मौत पानी में डूबने से हुई थी।
स्थानीय लोगों ने दोनों युवतियों की बलात्कार के बाद हत्या किए जाने का आरोप लगाया था। कथित हत्या के विरोध में शोपियां मजलिस मुशावरात ने 47 दिन तक शोपियां कस्बे में बंद रखा।
मंगलवार को श्रीनगर और घाटी के अन्य कस्बों में दुकानें बंद रहीं और यातायात प्रभावित हुआ।
अधिकारियों ने हुर्रियत के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारुक, शब्बीर शाह और नईम खान सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं को मंगलवार सुबह उनके घरों में कैद कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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