पश्चिम बंगाल में हिंसा बंद करने की अपील

Gopal Krishna Gandhi
कोलकाता। महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी रविवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के पद से मुक्त हो गए। अपने कार्यकाल के आखिरी दिन उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि पश्चिम बंगाल को अपूरणीय क्षति से बचाने के लिए हिंसा बंद हो।

गांधी ने कहा कि जब तक सभी दल और उनके समर्थक हिंसा बंद नहीं करेंगे तब तक राज्य में शांति कायम नहीं हो सकेगी और इससे प्रदेश को अपूरणीय क्षति होगी। सभी राजनीतिक दलों को बंद, प्रदर्शन, विस्फोट जैसी कार्रवाई बंद करना होगी। किसी भी दल को अवैध हथियार रखने का अधिकार नहीं है। सभी तरह के उकसावे पर भी रोक लगानी होगी।

राजभवन को अलविदा कहा

राज्यपाल के रूप में अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर आयोजित एक चाय पार्टी के साथ उन्होंने राजभवन को अलविदा कह दिया। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी गांधी (64) ने 14 दिसंबर, 2004 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का पदभार ग्रहण किया था। उनके कार्यकाल के दौरान राज्य में भारी अशांति देखने को मिली थी। नंदीग्राम व सिंगूर जैसी घटनाएं घटीं।

गांधी ने प्रत्येक घटनाओं पर विनम्रता लेकिन पूरी दृढ़ता के साथ अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने अपने पद की मर्यादा और जिम्मेदारी के साथ कभी समझौता नहीं किया।

रविवार को गांधी ने दिन में वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के घर जाकर उनसे मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान बसु ने गांधी से कहा, "मैं आपसे पूरी तरह खुश हूं।" गांधी ने बीमार बसु से कहा, "मैं सोमवार को यहां से जा रहा हूं। मैं वापस चेन्नई लौट रहा हूं। लेकिन आपसे मुलाकात और आपको नमस्कार किए बगैर यहां से नहीं जा सकता था।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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